अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अब तक का सबसे कड़ा रुख अपनाते हुए सीधी सैन्य कार्रवाई की धमकी दी है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर घोषणा की है कि यदि ईरान उनके द्वारा प्रस्तावित “निष्पक्ष और उचित” समझौते को स्वीकार नहीं करता है, तो अमेरिका ईरान के हर एक पावर प्लांट और पुल को तबाह कर देगा। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब “नरम रुख” का समय बीत चुका है और वे ईरान की सैन्य और आर्थिक शक्ति को जड़ से खत्म करने के लिए तैयार हैं।
ट्रंप ने अपने बयान में ईरान पर युद्धविराम के उल्लंघन का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में ईरान द्वारा की गई गोलीबारी ने शांति के प्रयासों को बाधित किया है। ईरान द्वारा इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को बंद करने की धमकी पर तंज कसते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका की नाकेबंदी ने इसे पहले ही प्रभावी रूप से बंद कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि ईरान की यह हरकतें अनजाने में अमेरिका की मदद कर रही हैं और इससे ईरान को ही आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
तेल की वैश्विक आपूर्ति और अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव को लेकर ट्रंप ने बेबाकी से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि होर्मुज के बंद होने से अमेरिका को कोई नुकसान नहीं होगा, क्योंकि टेक्सास, लुइसियाना और अलास्का जैसे अमेरिकी राज्यों से तेल का निर्यात निरंतर जारी है। ट्रंप के अनुसार, ईरान की आईआरजीसी (IRGC) ताकतवर बनने की कोशिश में अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार रही है, जबकि दुनिया भर के तेल टैंकर अब अमेरिका की ओर रुख कर रहे हैं।
इस भारी तनाव के बीच, कूटनीति के मोर्चे पर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद अब केंद्र बिंदु बन गई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने पुष्टि की है कि उनके प्रतिनिधियों की एक विशेष टीम सोमवार शाम को ईरान के साथ दूसरे दौर की वार्ता के लिए इस्लामाबाद पहुंच रही है। यह बैठक दोनों देशों के बीच युद्ध को टालने का अंतिम प्रयास मानी जा रही है। ट्रंप ने उम्मीद जताई है कि ईरान इस बार समझौते पर हस्ताक्षर कर देगा, अन्यथा परिणाम विनाशकारी होंगे।
इस्लामाबाद में इस हाई-प्रोफाइल बैठक को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। वार्ता के केंद्र ‘सेरेना होटल’ को पूरी तरह सुरक्षित घेरे में ले लिया गया है और वहां नई बुकिंग पर रोक लगा दी गई है। अमेरिकी सुरक्षा और खुफिया टीमें पहले ही पाकिस्तान पहुंच चुकी हैं और स्थानीय सुरक्षा बलों के साथ मिलकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा ले रही हैं। पूरा विश्व अब सोमवार को होने वाली इस वार्ता पर नजरें टिकाए हुए है, क्योंकि इसकी विफलता सीधे तौर पर युद्ध की शुरुआत कर सकती है।
अंत में, ट्रंप ने इसे एक ऐतिहासिक जिम्मेदारी करार देते हुए कहा कि जो काम पिछले 47 वर्षों में अन्य अमेरिकी राष्ट्रपतियों को करना चाहिए था, वह अब वे करने जा रहे हैं। उन्होंने ईरान की शासन व्यवस्था को एक “किलिंग मशीन” बताते हुए इसे खत्म करने की बात दोहराई। ट्रंप का यह रुख संकेत देता है कि वे ईरान के साथ किसी भी लंबी खींचतान के मूड में नहीं हैं और जल्द से जल्द एक निर्णायक नतीजे पर पहुंचना चाहते हैं।

