दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे शातिर प्रेमी जोड़े को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने फिल्मी अंदाज़ में ठगी की वारदातों को अंजाम देकर सनसनी फैला दी थी। ‘बंटी और बबली’ के नाम से मशहूर हुए इस जोड़े की पहचान मंसूर अहमद और उसकी प्रेमिका रोजी के रूप में हुई है। ये दोनों सोशल मीडिया के जरिए मासूम लोगों को अपना शिकार बनाते थे। हैरानी की बात यह है कि आरोपी केवल हाई स्कूल और इंटर पास हैं, लेकिन उन्होंने अपराध करने का तरीका नामी क्राइम थ्रिलर फिल्मों और टीवी सीरियल्स को देखकर सीखा था।
ठगी के इस खेल की शुरुआत मुजफ्फरनगर के शाहपुर क्षेत्र की रहने वाली इकरा नाम की महिला की शिकायत से हुई। इकरा ने पुलिस को बताया कि व्हाट्सएप के माध्यम से उसकी पहचान हिदायतुल्लाह नाम के एक व्यक्ति से हुई थी। असल में यह व्यक्ति दिल्ली निवासी मंसूर अहमद ही था, जो अपनी पहचान छिपाकर बात कर रहा था। आरोपी ने बेहद शातिर तरीके से इकरा का भरोसा जीता और उसे अपनी ‘मुंहबोली बहन’ बनाकर उसके परिवार की तमाम गोपनीय जानकारियां और कमजोरियां हासिल कर लीं।
एक बार जब आरोपी के पास परिवार की पर्याप्त जानकारी जमा हो गई, तो उसने अपनी प्रेमिका रोजी के साथ मिलकर इकरा के परिवार को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। कभी वे फर्जी सीबीआई अधिकारी बनकर घर में छापेमारी की धमकी देते, तो कभी कस्टम अधिकारी बनकर केस दर्ज करने का डर दिखाते। आरोपियों ने बाकायदा फर्जी आईडी कार्ड और नकली सर्च वारंट भी तैयार कर रखे थे, ताकि शिकार को उनकी बातों पर पूरा यकीन हो जाए। इस डर और दबाव के चलते पीड़ित परिवार ने आरोपियों को करीब 5 लाख रुपये सौंप दिए।
ठगी का शिकार होने के बाद जब इकरा को अहसास हुआ कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है, तो उन्होंने पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत मुकदमा दर्ज किया और सर्विलांस टीम की मदद ली। तकनीकी जांच और मोबाइल लोकेशन के आधार पर पुलिस ने घेराबंदी की और रविवार को इस शातिर प्रेमी जोड़े को दिल्ली से गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की। गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में इस जोड़े ने अपने जुर्म को स्वीकार कर लिया है।
पुलिस ने आरोपियों के पास से ठगी के माध्यम से जुटाए गए 2 लाख रुपये की नकदी बरामद की है। इसके अलावा, उनके पास से तीन मोबाइल फोन, तीन डेबिट कार्ड, एक बैंक पासबुक और सबसे महत्वपूर्ण सबूत के तौर पर वह फर्जी आईडी कार्ड और सर्च वारंट भी बरामद किया गया है, जिसका उपयोग वे लोगों को डराने के लिए करते थे। पुलिस अब इनके बैंक खातों और अन्य संपत्तियों की भी जांच कर रही है ताकि ठगी गई पूरी रकम का पता लगाया जा सके।
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने खुलासा किया कि वे अब तक लगभग 20 लोगों को इसी तरह अपना शिकार बना चुके हैं और उनसे लाखों रुपये ऐंठ चुके हैं। वे मुख्य रूप से सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते थे और ऐसे लोगों को ढूंढते थे जिन्हें आसानी से डराया जा सके। अपनी ऐशो-आराम की जरूरतों और खर्चों को पूरा करने के लिए उन्होंने अपराध का यह रास्ता चुना था। फिलहाल, पुलिस इस गिरोह के अन्य संभावित संपर्कों की तलाश कर रही है और आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

