ई-कॉमर्स दिग्गज Flipkart अब मनोरंजन और फूड डिलीवरी की दुनिया में एक साथ कदम रखने की बड़ी तैयारी कर रहा है। वॉलमार्ट के मालिकाना हक वाली यह कंपनी आगामी मई तक लाइव इवेंट्स, टिकटिंग और फूड डिलीवरी सेवाओं का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। यह विस्तार Flipkart की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह खुद को केवल एक शॉपिंग वेबसाइट तक सीमित न रखकर एक ‘सुपर ऐप’ के रूप में स्थापित करना चाहती है। लाइव इवेंट्स के क्षेत्र में Flipkart का प्रवेश भारतीय बाजार में बढ़ते ‘एक्सपीरियंस इकोनॉमी’ के क्रेज को भुनाने की कोशिश है, जहाँ वह सीधे तौर पर BookMyShow और Zomato के नए प्लेटफॉर्म ‘District’ को कड़ी टक्कर देगा।
फूड डिलीवरी का खेल अब सिर्फ रेस्तरां से खाना पहुँचाने तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि ’10 मिनट कैफे-स्टाइल डिलीवरी’ ने बाजार में नई हलचल पैदा कर दी है। Swiggy का Bolt, Blinkit का Bistro और Zepto Cafe जैसे मॉडल्स ग्राहकों को बिजली जैसी तेजी से किफायती विकल्प दे रहे हैं। Flipkart पहले ही अपनी 10 मिनट ग्रॉसरी डिलीवरी सेवा ‘Minutes’ के जरिए इस रेस में शामिल हो चुका है, जो वर्तमान में 800 से ज्यादा डार्क स्टोर्स ऑपरेट कर रहा है। क्विक कॉमर्स में भारी डिस्काउंटिंग के जरिए कंपनी पहले ही Blinkit और Instamart जैसे खिलाड़ियों को चुनौती दे रही है, और अब फूड डिलीवरी में एंट्री उसकी इस पकड़ को और मजबूत करेगी।
IPO से पहले यह Flipkart का एक बड़ा दांव माना जा रहा है। FY25 में कंपनी ने अपने खर्चों में कटौती कर घाटा कम करने में सफलता पाई है, जहाँ उसका कोर मार्केटप्लेस बिजनेस 14% बढ़कर 20,493 करोड़ रुपये पर पहुँच गया है। फूड डिलीवरी जैसे ‘हाई-फ्रीक्वेंसी’ बिजनेस में उतरने से कंपनी को ग्राहकों की ब्रांड लॉयल्टी हासिल करने में मदद मिलेगी, क्योंकि यहाँ ग्राहक बार-बार ऑर्डर करते हैं। पब्लिक लिस्टिंग से पहले इस तरह के नए बिजनेस वर्टिकल कंपनी के वैल्यूएशन को एक नई और सकारात्मक दिशा दे सकते हैं।
हालांकि, भारत में फूड डिलीवरी की राह किसी भी नए खिलाड़ी के लिए आसान नहीं रही है। इतिहास गवाह है कि Uber Eats को अपना कारोबार Zomato को बेचना पड़ा, जबकि Ola और Amazon जैसी दिग्गज कंपनियां भी इस सेक्टर में हाथ आजमाने के बाद पीछे हट गईं। वर्तमान में Zomato और Swiggy के दबदबे के बीच Rapido की ‘Ownly’ जैसी नई सेवाएं भी कम कमीशन के वादे के साथ बाजार में उतर रही हैं। ऐसे प्रतिस्पर्धी माहौल में Flipkart को अपनी जगह बनाने के लिए न केवल अपनी सर्विस क्वालिटी बल्कि अपनी आक्रामक मार्केटिंग रणनीति पर भी निर्भर रहना होगा।
बाजार के जानकारों का मानना है कि पोस्ट-कोविड दौर के बाद अब फूड डिलीवरी सेक्टर में सुधार के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं। हालिया तिमाहियों में Zomato और Swiggy के ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू में 20% से ज्यादा की सालाना बढ़त दर्ज की गई है। अनुमान है कि FY30 तक ट्रांजैक्टिंग यूजर्स की संख्या 15 करोड़ के पार पहुँच जाएगी। इसी बढ़ती संभावना को देखते हुए Flipkart और Google जैसे निवेशक (जिसने हाल ही में 35 करोड़ डॉलर का निवेश किया है) भारतीय डिजिटल इकोसिस्टम के इस महत्वपूर्ण हिस्से पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहते हैं।
अंततः, Flipkart के इन नए कदमों से भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ना तय है, जिसका सीधा फायदा उपभोक्ताओं को बेहतर ऑफर्स और तेज डिलीवरी के रूप में मिल सकता है। कंपनी अपनी होल्डिंग संरचना को वापस भारत लाने (रिवर्स फ्लिप) और Myntra जैसे वर्टिकल्स को मजबूत करने के साथ-साथ अब फूड और इवेंट्स के जरिए एक पूर्ण इकोसिस्टम तैयार कर रही है। यदि Flipkart की यह योजना सफल रहती है, तो यह न केवल इसके IPO के लिए मील का पत्थर साबित होगी, बल्कि भारतीय ई-कॉमर्स और सर्विस सेक्टर के भविष्य को भी नई परिभाषा देगी।

