जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने केंद्र शासित प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को राष्ट्रविरोधी तत्वों से मुक्त रखने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। सरकार ने प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी और उसकी शैक्षणिक शाखा, फलाह-ए-आम ट्रस्ट द्वारा संचालित 58 स्कूलों की प्रबंधन समितियों को पूरी तरह से अपने नियंत्रण में ले लिया है। यह कार्रवाई उन संस्थानों के खिलाफ की गई है, जिनके बारे में खुफिया एजेंसियों ने प्रतिकूल रिपोर्ट दी थी कि इनका इस्तेमाल कट्टरपंथ या अवैध गतिविधियों के लिए किया जा सकता है।
सरकार का प्राथमिक तर्क यह है कि इन स्कूलों में पढ़ने वाले हजारों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा था। अधिकारियों के अनुसार, इन स्कूलों की मौजूदा प्रबंधन समितियों की वैधता न केवल समाप्त हो चुकी थी, बल्कि उनके तार प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े होने के कारण छात्रों के शैक्षणिक माहौल पर भी खतरा मंडरा रहा था। इस अधिग्रहण के जरिए सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि शिक्षण संस्थानों का उपयोग केवल शिक्षा के लिए हो और किसी भी प्रकार की राष्ट्रविरोधी विचारधारा को वहां पनपने का मौका न मिले।
यह कार्रवाई किसी आकस्मिक घटना का परिणाम नहीं है, बल्कि एक व्यापक अभियान का हिस्सा है। इससे पहले अगस्त 2025 में भी सरकार ने इसी तरह का कड़ा रुख अपनाते हुए लगभग 215 स्कूलों को अपने दायरे में लिया था। लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि प्रशासन घाटी में किसी भी ऐसे संगठन की जड़ें काटने के लिए प्रतिबद्ध है, जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से अलगाववाद या प्रतिबंधित गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं।
कानूनी रूप से देखा जाए तो गृह मंत्रालय ने 28 फरवरी 2019 और फिर 27 फरवरी 2024 को ‘गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम’ (UAPA) के तहत जमात-ए-इस्लामी को एक प्रतिबंधित संगठन घोषित किया था। इसी प्रतिबंध के आधार पर, संगठन की संपत्तियों और उससे जुड़ी संस्थाओं की जांच की गई, जिसमें फलाह-ए-आम ट्रस्ट के तहत चलने वाले इन स्कूलों की पहचान की गई। सरकार का मानना है कि इन ट्रस्टों के माध्यम से जुटाए गए संसाधनों का गलत इस्तेमाल होने की प्रबल संभावना थी।
प्रशासनिक स्तर पर इस आदेश को तुरंत प्रभावी बनाने के लिए सभी जिलों के उपायुक्तों (DC) को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। उपायुक्तों को जिम्मेदारी दी गई है कि वे इन 58 स्कूलों का पूर्ण नियंत्रण अपने हाथ में लें और पुरानी समितियों को भंग कर नई, जांची-परखी प्रबंधन समितियां गठित करें। इन नई समितियों में ऐसे लोगों को शामिल किया जाएगा जिनकी पृष्ठभूमि निष्पक्ष हो और जो शिक्षा के मानकों को बनाए रखने में सक्षम हों।
स्कूलों के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने वहां विशेष टीमें भी तैनात की हैं। प्रशासन का लक्ष्य है कि इस बदलाव के दौरान छात्रों की पढ़ाई में एक दिन का भी व्यवधान न आए। शिक्षकों और कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपना काम जारी रखें, लेकिन अब उनकी जवाबदेही सीधे तौर पर जिला प्रशासन के प्रति होगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कदम किसी संस्थान को बंद करने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें सुधारने और सुरक्षित बनाने के लिए उठाया गया है।
अंततः, जम्मू-कश्मीर सरकार का यह कदम क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। शिक्षा के क्षेत्र से प्रतिबंधित संगठनों के प्रभाव को खत्म करके सरकार नई पीढ़ी को एक सुरक्षित और मुख्यधारा की ओर ले जाने वाले भविष्य की गारंटी देना चाहती है। इस कार्रवाई ने यह भी साफ कर दिया है कि राष्ट्र की सुरक्षा और छात्रों के हित के साथ किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।

