ईरान और अमेरिका के बीच छिड़े युद्ध के कारण रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई है। शनिवार, 18 अप्रैल 2026 को ईरान द्वारा जलमार्ग की नाकेबंदी और रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की गनबोटों द्वारा की गई फायरिंग के बावजूद, भारतीय झंडे वाले तेल टैंकर ‘देश गरिमा’ ने सफलतापूर्वक इस जलमार्ग को पार कर लिया। यह पोत भारतीय नौवाहन निगम लिमिटेड (SCI) का है और मार्च की शुरुआत से अब तक इस खतरनाक रास्ते को पार करने वाला भारत का 10वां जहाज बन गया है।
हालांकि, सभी भारतीय जहाजों के लिए यह सफर आसान नहीं रहा। मरीन ट्रैफिक और जहाजों के निगरानी आंकड़ों के अनुसार, कम से कम चार अन्य भारतीय जहाजों—‘सनमार हेराल्ड’, ‘देश वैभव’, ‘देश विभोर’ और मालवाहक पोत ‘जग अर्नव’—को ईरानी बलों की ओर से की गई फायरिंग के बाद अपना रास्ता बदलने पर मजबूर होना पड़ा। बताया जा रहा है कि ओमान के उत्तर-पूर्व में करीब 20 समुद्री मील दूर ईरान की दो नौकाओं ने व्यापारिक जहाजों को डराने के लिए गोलियां चलाईं, जिसके बाद सुरक्षा के लिहाज से इन जहाजों ने वापस लौटना ही बेहतर समझा।
इस गंभीर घटना के बाद भारत सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने नई दिल्ली में ईरान के राजदूत को तलब कर इस गोलीबारी पर कड़ी आपत्ति जताई। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने ईरानी राजदूत के सामने दो भारतीय जहाजों पर हुई फायरिंग को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में व्यापारिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा भारत के लिए प्राथमिकता है और इस तरह की सैन्य कार्रवाई स्वीकार्य नहीं है।
विदेश मंत्रालय ने ईरान को उसके पुराने रुख की भी याद दिलाई, जिसमें उसने पहले कई भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता प्रदान करने का वादा किया था। भारत ने राजदूत के माध्यम से ईरानी अधिकारियों से आग्रह किया है कि वे होर्मुज से भारत आने वाले जहाजों के लिए सुगम और सुरक्षित मार्ग की प्रक्रिया को जल्द से जल्द बहाल करें। जवाब में, ईरानी राजदूत ने आश्वासन दिया है कि वे भारत की इन चिंताओं और नजरिए को तुरंत अपनी सरकार और सैन्य अधिकारियों तक पहुंचाएंगे।
वर्तमान में फारस की खाड़ी में भारतीय ध्वज वाले जहाजों की संख्या बढ़कर 14 हो गई है, जिनकी सुरक्षा को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। इनमें से सरकारी कंपनी SCI के जहाज ‘देश वैभव’ और ‘देश विभोर’ के साथ-साथ निजी कंपनियों के जहाज ‘सनमार हेराल्ड’ और ‘जग अर्नव’ को गोलीबारी के कारण पीछे हटना पड़ा। टैंकरट्रैकर्सडॉटकॉम के अनुसार, इनमें से कुछ जहाजों पर इराकी कच्चे तेल का बड़ा स्टॉक लदा हुआ है, जो भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण है।
युद्ध की इस स्थिति ने वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला को बुरी तरह प्रभावित किया है। ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी ने खाड़ी देशों से होने वाले व्यापार पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि ताजा झड़पों के बावजूद किसी भी भारतीय नाविक के हताहत होने या जहाज को बड़े नुकसान की खबर नहीं है। भारत अब कूटनीतिक और सामरिक दोनों स्तरों पर प्रयास कर रहा है ताकि खाड़ी क्षेत्र में फंसे उसके बाकी जहाज सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक पहुँच सकें।

