तेहरान/वाशिंगटन: पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीदों को एक बड़ा झटका लगा है। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से बंद करने का ऐलान कर दिया है, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा में भारी अफरा-तफरी का माहौल है। ईरान की सरकारी प्रेस मीडिया द्वारा साझा किए गए जहाजों के ट्रैकिंग डेटा से पता चलता है कि दर्जनों वाणिज्यिक जहाज, जो होर्मुज पार करने की तैयारी में थे, अब वापस लौट रहे हैं। ईरान की ओर से जारी सख्त संदेश में कहा गया है कि सैन्य और शत्रु जहाजों को इस जलडमरूमध्य से गुजरने का कोई अधिकार नहीं है।
यह तनाव तब शुरू हुआ जब ईरान ने अमेरिका पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया। ईरान का कहना है कि उसने सद्भावना के तौर पर होर्मुज को खोल दिया था, लेकिन अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी (Naval Blockade) को खत्म नहीं किया। ईरानी कमान के अनुसार, वाशिंगटन ‘समुद्री डकैती’ जैसी गतिविधियों में शामिल है और जब तक ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी प्रतिबंध और घेराबंदी जारी रहेगी, तब तक होर्मुज से किसी भी प्रकार के आवागमन को अनुमति नहीं दी जाएगी।
उल्लेखनीय है कि महज एक दिन पहले ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने होर्मुज को सभी वाणिज्यिक जहाजों के लिए खोलने की घोषणा की थी। यह फैसला लेबनान और इजरायल के बीच हुए 10 दिवसीय युद्धविराम के बाद लिया गया था। इस कदम का स्वागत खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी किया था और इसके लिए ईरान का आभार जताया था। लगा था कि इस कदम से वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता आएगी, लेकिन यह राहत बहुत कम समय के लिए ही रही।
विवाद की मुख्य वजह डोनाल्ड ट्रंप का वह बयान बना जिसमें उन्होंने कहा कि होर्मुज तो व्यापार के लिए खुला रहेगा, लेकिन ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नाकाबंदी तब तक जारी रहेगी जब तक तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर वाशिंगटन के साथ कोई स्थायी समझौता नहीं कर लेता। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ईरान के साथ व्यापार पर लगी रोक तब तक नहीं हटेगी जब तक अमेरिका की शर्तें पूरी नहीं होतीं। इस दोहरी रणनीति ने ईरान को भड़का दिया, जिसने इसे अपनी संप्रभुता पर हमला माना।
अब स्थिति यह है कि ईरान ने होर्मुज को अपनी “पिछली स्थिति” में ले जाने का आदेश जारी कर दिया है। यानी अब यह रणनीतिक जलमार्ग फिर से पूरी तरह ईरान के सैन्य नियंत्रण में है। सैन्य जानकारों का मानना है कि ईरान ने अपनी तटीय मिसाइलों और गश्ती नौकाओं को अलर्ट पर रखा है, जिससे किसी भी जहाज का वहां से गुजरना अब खतरे से खाली नहीं है। शिपिंग कंपनियों को सुरक्षा कारणों से अपने जहाजों को सुरक्षित बंदरगाहों की ओर ले जाने की सलाह दी गई है।
दूसरी ओर, डोनाल्ड ट्रंप ने भी अपने तेवर कड़े कर लिए हैं। उन्होंने ईरान को आने वाले बुधवार तक की अंतिम चेतावनी (Deadline) दी है। ट्रंप का कहना है कि यदि बुधवार तक ईरान के साथ परमाणु कार्यक्रम और अन्य क्षेत्रीय मुद्दों पर कोई व्यापक समझौता नहीं हुआ, तो न केवल नाकाबंदी जारी रहेगी, बल्कि लेबनान-इजरायल युद्धविराम के बीच बनी शांति भी खत्म हो सकती है। ट्रंप ने सीधी धमकी देते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में अमेरिका को फिर से ईरान पर बमबारी शुरू करनी पड़ सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह गतिरोध बुधवार तक नहीं सुलझा, तो दुनिया एक बड़े ऊर्जा संकट की चपेट में आ सकती है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20% हिस्सा नियंत्रित करता है। ईरान और अमेरिका के बीच की यह ‘नूराकुश्ती’ यदि युद्ध में तब्दील हुई, तो कच्चे तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होगा।
फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें बुधवार की समयसीमा पर टिकी हैं। कूटनीतिक गलियारों में चर्चा है कि क्या कोई तीसरा देश इस मामले में मध्यस्थता कर पाएगा या फिर पश्चिम एशिया एक नए और अधिक विनाशकारी युद्ध की आग में झुलसने वाला है। ईरान के कड़े रुख और ट्रंप की बमबारी की धमकी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चिंता में डाल दिया है।

