पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग (23 अप्रैल) से महज 5 दिन पहले आयकर विभाग ने दक्षिण कोलकाता में बड़ी छापेमारी की है। इस कार्रवाई का मुख्य केंद्र मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नामांकन पत्र के प्रस्तावक रहे मिराज शाह और रासबिहारी निर्वाचन क्षेत्र से टीएमसी उम्मीदवार देबाशीष कुमार का आवास रहा। शुक्रवार तड़के करीब 5:30 बजे केंद्रीय सुरक्षा बलों (CAPF) के साथ आयकर अधिकारियों की टीमें मनोहर पुकुर रोड और एल्गिन रोड स्थित इनके ठिकानों पर पहुँचीं, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।
यह छापेमारी मुख्य रूप से कथित अवैध भूमि सौदों (Land Grabbing Case) और वित्तीय अनियमितताओं की जांच से जुड़ी बताई जा रही है। आयकर विभाग के साथ-साथ प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी पिछले कुछ समय से देबाशीष कुमार से पूछताछ कर रहा था। अधिकारियों ने न केवल उनके घर, बल्कि उनके ससुराल, चुनाव कार्यालय और पार्षद कार्यालय सहित करीब पांच ठिकानों पर एक साथ तलाशी ली। सूत्रों के अनुसार, जांच दल कुछ विशिष्ट वित्तीय दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों की तलाश में था, जो चुनाव के दौरान संदिग्ध लेन-देन की ओर इशारा करते हैं।
इस घटनाक्रम पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे केंद्र की ‘प्रतिशोध की राजनीति’ करार दिया है। कूचबिहार की एक चुनावी रैली में उन्होंने भाजपा को ‘कायर’ बताते हुए आरोप लगाया कि जब भाजपा चुनाव मैदान में हारने लगती है, तो वह ED, CBI और IT जैसी एजेंसियों को आगे कर देती है। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग (ECI) की भूमिका पर भी सवाल उठाए और कहा कि चुनाव के बीच उम्मीदवारों के ठिकानों पर रेड डालना लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बाधा डालने जैसा है।
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने इन छापों का बचाव करते हुए इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ एक निष्पक्ष कार्रवाई बताया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि एजेंसियां अपने पास मौजूद ठोस सबूतों के आधार पर काम कर रही हैं और इसका चुनाव से कोई लेना-देना नहीं है। भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा कि टीएमसी ‘चोर मचाए शोर’ वाली नीति अपना रही है और जांच से बचने के लिए राजनीतिक विक्टिम कार्ड खेल रही है।
छापेमारी के दौरान देबाशीष कुमार के घर के बाहर बड़ी संख्या में टीएमसी कार्यकर्ता जमा हो गए और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं ने इसे चुनाव प्रचार रोकने की साजिश बताया क्योंकि देबाशीष कुमार को रेड के कारण अपना कीमती चुनावी प्रचार छोड़ना पड़ा। 2026 के इस हाई-वोल्टेज चुनाव में, जहां मतदान के दो चरण (23 और 29 अप्रैल) होने हैं, इस तरह की कार्रवाइयों ने न केवल राजनीतिक माहौल गर्मा दिया है, बल्कि मतदाताओं के बीच भी एक बड़ी चर्चा छेड़ दी है।

