छत्तीसगढ़ में औद्योगिक बुनियादी ढांचे को नई ऊंचाइयों पर ले जाने और वैश्विक निवेश को आकर्षित करने के लिए सरकार ने अपनी कमर कस ली है। इसी क्रम में सोमवार को नवा रायपुर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम (CSIDC) की सार्वजनिक निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति (PPPAC) ने प्रदेश की कई बड़ी और महत्वपूर्ण परियोजनाओं की समीक्षा की, जिन्हें आने वाले समय में पीपीपी (PPP) मॉडल के जरिए धरातल पर उतारा जाना है।
बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु राज्य के विभिन्न जिलों में अधोसंरचना विकास के माध्यम से आर्थिक गतिविधियों को तेज करना रहा। चर्चा के दौरान बिलासपुर में एक व्यवस्थित ‘ट्रांसपोर्ट नगर’ के विकास और नवा रायपुर में अंतरराष्ट्रीय स्तर के ‘कन्वेंशन सेंटर’ के निर्माण को प्राथमिकता दी गई। ये परियोजनाएं न केवल शहरों के स्वरूप को बदलेंगी, बल्कि छत्तीसगढ़ को व्यापारिक आयोजनों और सुगम परिवहन के एक प्रमुख केंद्र के रूप में भी स्थापित करेंगी।
औद्योगिक विस्तार की दिशा में कदम बढ़ाते हुए समिति ने धमतरी के छाती और बलौदाबाजार के चंदेरी में नए औद्योगिक क्षेत्रों को विकसित करने की योजना पर विस्तृत विचार-विमर्श किया। इसके अलावा, भिलाई जैसे औद्योगिक गढ़ में कमर्शियल टॉवर और ‘फ्लेटेड फैक्ट्री बिल्डिंग’ के निर्माण का प्रस्ताव भी रखा गया है। फ्लेटेड फैक्ट्री का कॉन्सेप्ट छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा, जहाँ एक ही छत के नीचे कई इकाइयां कुशलतापूर्वक कार्य कर सकेंगी।
मुख्य सचिव विकासशील ने बैठक के दौरान अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि राज्य में निवेश की राह को आसान बनाने के लिए नियमों का सरलीकरण (Simplification of Rules) अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक ढांचे को तभी मजबूती मिलेगी जब प्रशासनिक प्रक्रियाएं पारदर्शी और बाधा-मुक्त होंगी। उन्होंने इंडस्ट्रियल पार्कों के आवंटन की प्रक्रिया में सुधार लाने की बात कही, ताकि वास्तविक उद्यमियों को बिना किसी देरी के संसाधन उपलब्ध हो सकें।
समीक्षा बैठक में उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के सचिव रजत कुमार ने एक व्यापक प्रस्तुतिकरण दिया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में पीपीपी मॉडल की परियोजनाएं किस चरण में हैं और भविष्य में इनके क्रियान्वयन की समय-सीमा क्या होगी। इस दौरान उन्होंने निवेशकों की जरूरतों और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बुनियादी ढांचा तैयार करने की कार्ययोजना भी साझा की, जिससे छत्तीसगढ़ की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ सके।
प्रशासनिक समन्वय को प्रदर्शित करते हुए इस बैठक में विधि एवं विधायी विभाग की प्रमुख सचिव सुषमा सावंत और वित्त विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अलग-अलग विभागों की इस भागीदारी का उद्देश्य परियोजनाओं में आने वाली वित्तीय और कानूनी बाधाओं को पहले ही सुलझाना है, ताकि निर्माण कार्य शुरू होने के बाद किसी भी प्रकार का विलंब न हो।
कुल मिलाकर, राज्य सरकार का यह कदम छत्तीसगढ़ को केवल ‘खनिज प्रधान’ राज्य की छवि से बाहर निकालकर एक ‘आधुनिक औद्योगिक पावरहाउस’ बनाने की दिशा में बड़ा संकेत है। पीपीपी मॉडल के माध्यम से निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता और सरकारी संसाधनों का मेल प्रदेश में रोजगार के नए अवसर पैदा करने के साथ-साथ राजस्व वृद्धि में भी सहायक होगा।

