रायपुर, 8 मई 2026: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के संवेदनशील नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने आज सामाजिक एकता और जनकल्याण का एक नया अध्याय लिखा है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत प्रदेश भर में आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रमों में 1385 जोड़े वैवाहिक बंधन में बंधे। शहनाइयों की गूंज और मांगलिक गीतों के बीच आयोजित इन समारोहों ने पूरे राज्य को उत्सव के रंग में सराबोर कर दिया, जो शासन की अंत्योदय के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
राजधानी रायपुर के भव्य आयोजन से लेकर बस्तर और सरगुजा के दूरस्थ वनांचलों तक, हर जिले में प्रशासन द्वारा चाक-चौबंद व्यवस्थाएं की गई थीं। इन समारोहों की सबसे सुंदर विशेषता इनकी समावेशी प्रकृति रही, जहाँ हिंदू, मुस्लिम, ईसाई और बौद्ध धर्मावलंबियों के साथ-साथ विशेष पिछड़ी जनजातियों के जोड़ों ने अपने-अपने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह संपन्न किया। यह दृश्य छत्तीसगढ़ की ‘साझा संस्कृति’ और ‘विविधता में एकता’ का जीवंत प्रमाण बनकर उभरा।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर नवविवाहित जोड़ों को अपना आशीर्वाद और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह योजना केवल एक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों के सपनों को सम्मान देने का एक जरिया है। उन्होंने रेखांकित किया कि सामूहिक विवाह आयोजनों से न केवल आर्थिक बोझ कम होता है, बल्कि समाज में फिजूलखर्ची को रोककर सादगी और समानता को बढ़ावा मिलता है।
समारोह में उपस्थित महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने आयोजन की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि शासन का लक्ष्य विवाह को केवल एक रस्म तक सीमित रखना नहीं, बल्कि इसे पूरी गरिमा और भव्यता प्रदान करना है। प्रशासन द्वारा नवदंपतियों के लिए गुणवत्तापूर्ण भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षा के ऐसे इंतजाम किए गए थे, जिससे हर परिवार को एक वीआईपी अनुभव प्राप्त हो सके।
आधिकारिक आंकड़ों पर नजर डालें तो वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए निर्धारित 3200 विवाहों के लक्ष्य की ओर सरकार तेजी से बढ़ रही है। 8 मई के इस राज्यव्यापी सफल आयोजन के बाद अब तक कुल 1732 जोड़े इस वर्ष वैवाहिक सूत्र में बंध चुके हैं। यह प्रगति दर्शाती है कि योजना का क्रियान्वयन जमीनी स्तर पर पूरी पारदर्शिता और गति के साथ किया जा रहा है, जिससे पात्र परिवारों को समय पर लाभ मिल रहा है।
योजना के आर्थिक पक्ष की बात करें तो प्रत्येक नवविवाहित दंपति को 35 हजार रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। यह राशि सीधे तौर पर नवदंपतियों को अपना नया जीवन आत्मनिर्भरता और स्वाभिमान के साथ शुरू करने में मदद करती है। इसके अतिरिक्त, विवाह के लिए आवश्यक दैनिक उपयोगी सामग्री और अन्य साज-सज्जा की व्यवस्था भी पूरी तरह से शासन द्वारा वहन की गई, जिससे परिवारों को आर्थिक चिंता से मुक्ति मिली।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने सामाजिक सरोकार के क्षेत्र में पहले ही वैश्विक कीर्तिमान स्थापित किया है। इसी वर्ष 10 फरवरी को मुख्यमंत्री की मौजूदगी में 6412 जोड़ों का एक साथ विवाह संपन्न हुआ था, जिसे ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में स्थान मिला। आज का आयोजन उसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने की एक कड़ी है, जिसने छत्तीसगढ़ को महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बना दिया है।
अंततः, यह वृहद आयोजन इस सत्य को पुष्ट करता है कि जब सरकारी नीतियां मानवीय संवेदनाओं से प्रेरित होती हैं, तो वे समाज में सकारात्मक क्रांति लाती हैं। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना आज छत्तीसगढ़ के घर-घर में खुशहाली का संदेश पहुंचा रही है और हजारों बेटियों के सुखी भविष्य की नींव रख रही है। यह सामूहिक प्रयास राज्य के चहुंमुखी विकास और सामाजिक समरसता की एक नई गाथा लिख रहा है।

