पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव की आहट के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रविवार को राजधानी कोलकाता में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच करते हुए केंद्रीय एजेंसी ने कई ठिकानों पर छापेमारी की और सन एंटरप्राइज के मैनेजिंग डायरेक्टर जॉय कामदार को गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई लंबे समय से चल रही वित्तीय अनियमितताओं और संदिग्ध बैंक लेनदेन की जांच का परिणाम है, जिसमें जॉय कामदार की भूमिका संदिग्ध पाई गई है।
जांच एजेंसी की यह कार्रवाई केवल व्यापारियों तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें प्रशासन के बड़े अधिकारी भी रडार पर आए हैं। ईडी की टीम ने कोलकाता पुलिस के डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा बिस्वास से जुड़े दो ठिकानों समेत कुल तीन स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान ईडी को ऐसे महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल सबूत मिले हैं, जो मनी लॉन्ड्रिंग के इस कथित नेटवर्क में पुलिस अधिकारियों और व्यापारियों के बीच गहरे तालमेल की ओर इशारा करते हैं।
गिरफ्तारी के बाद जॉय कामदार को तुरंत पूछताछ के लिए सीजीओ कॉम्प्लेक्स स्थित ईडी के क्षेत्रीय कार्यालय ले जाया गया है। ईडी के सूत्रों का कहना है कि कामदार से उन वित्तीय लेनदेन के बारे में पूछताछ की जा रही है जिनका कोई स्पष्ट रिकॉर्ड कंपनी के खातों में मौजूद नहीं था। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इन पैसों का इस्तेमाल राजनीतिक गतिविधियों या आगामी चुनावों को प्रभावित करने के लिए किया जाना था।
इस पूरे मामले को ‘सोना पप्पू और जय कामदार’ केस के नाम से जाना जा रहा है, जिसे धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत दर्ज किया गया है। ईडी इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि इस सिंडिकेट के माध्यम से कितना काला धन सफेद किया गया। हालांकि, जॉय कामदार के वकील सुब्रत सरकार ने इन आरोपों को चुनौती दी है। उनका तर्क है कि उनके मुवक्किल को गिरफ्तारी का ठोस कारण नहीं बताया गया और उन्हें केवल एक नोटिस के आधार पर कार्यालय बुलाकर हिरासत में ले लिया गया।
राजनीतिक दृष्टिकोण से यह छापेमारी बेहद संवेदनशील मानी जा रही है। चर्चा है कि इस मामले के तार सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कुछ सदस्यों से जुड़े हो सकते हैं। विपक्षी दल इस मुद्दे को भ्रष्टाचार के प्रमाण के तौर पर पेश कर रहे हैं, जबकि ईडी ने अभी तक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी या किसी शीर्ष राजनेता को व्यक्तिगत रूप से इस मामले में नामजद नहीं किया है। फिर भी, चुनाव से ठीक पहले एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और एक बड़े कारोबारी पर हुई इस कार्रवाई ने राज्य के सियासी तापमान को बढ़ा दिया है।
फिलहाल, ईडी की टीम जब्त किए गए दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कर रही है। आने वाले दिनों में शांतनु सिन्हा बिस्वास से भी विस्तृत पूछताछ होने की संभावना है, जिससे इस मनी लॉन्ड्रिंग केस में कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं। राज्य की जनता और राजनीतिक विश्लेषकों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि ईडी इस मामले में क्या नई कड़ियाँ जोड़ती है और यह जांच 2026 के चुनावी समीकरणों को कितना प्रभावित करती है।

