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    Home»बड़ी खबर»ईरान-अमेरिका तनाव की आंच भारत तक: होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय जहाज पर गोलीबारी, MEA ने दर्ज कराया औपचारिक विरोध
    बड़ी खबर

    ईरान-अमेरिका तनाव की आंच भारत तक: होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय जहाज पर गोलीबारी, MEA ने दर्ज कराया औपचारिक विरोध

    Brijesh ChoudharyBy Brijesh ChoudharyApril 18, 2026324 Views
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    दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में एक बार फिर युद्ध जैसे हालात बन गए हैं। शनिवार को ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की दो गनबोट्स ने इस मार्ग से गुजर रहे जहाजों पर अचानक गोलीबारी शुरू कर दी। ब्रिटिश सेना और यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर ने इस हमले की पुष्टि करते हुए बताया कि हमला बिना किसी रेडियो चेतावनी के किया गया था। इस घटना ने वैश्विक समुद्री व्यापार और सुरक्षा व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है।

    इस हमले का सबसे चिंताजनक पहलू भारत से जुड़ा है। शिपिंग मॉनिटर ‘टैंकर ट्रैकर्स’ और विभिन्न सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, जिन दो जहाजों को निशाना बनाया गया, उनमें एक भारतीय झंडे वाला तेल टैंकर भी शामिल था। रिपोर्ट के मुताबिक, यह भारतीय जहाज लगभग 20 लाख बैरल इराकी तेल लेकर जा रहा था। गनीमत यह रही कि गोलीबारी के बावजूद टैंकर और उसमें सवार चालक दल के सभी सदस्य पूरी तरह सुरक्षित हैं, हालांकि सुरक्षा कारणों से जहाज को अपना रास्ता बदलकर वापस लौटना पड़ा।

    इस घटना के तुरंत बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने शनिवार को नई दिल्ली में तैनात ईरान के राजदूत को तलब किया और इस हमले पर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। भारत के लिए यह मामला केवल सुरक्षा का नहीं बल्कि ऊर्जा आपूर्ति से भी जुड़ा है, क्योंकि खाड़ी देशों से आने वाला अधिकांश कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। इस कूटनीतिक विरोध के जरिए भारत ने ईरान को स्पष्ट संदेश दिया है कि भारतीय हितों और समुद्री सुरक्षा के साथ समझौता नहीं किया जाएगा।

    ईरान की ओर से यह आक्रामक कार्रवाई अचानक नहीं हुई है। इससे ठीक पहले ईरान ने घोषणा की थी कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य पर फिर से कड़े सैन्य प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। ईरान का आरोप है कि अमेरिका लगातार सीजफायर की शर्तों का उल्लंघन कर रहा है, जिसके जवाब में उसने 24 घंटे के भीतर अपनी रणनीति बदल दी। ईरान ने स्पष्ट किया है कि अब इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही को पूरी तरह से सैन्य निगरानी में रखा जाएगा और किसी भी ‘अनधिकृत’ जहाज को गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

    ईरान के इस कदम के पीछे असल वजह अमेरिका द्वारा ईरानी शिपिंग और बंदरगाहों पर लगाए गए सख्त आर्थिक प्रतिबंध हैं। ईरान के नेताओं का कहना है कि जब तक अमेरिका ये प्रतिबंध नहीं हटाता, तब तक वह इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग को अपनी शर्तों पर चलाएगा। ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने तो यहाँ तक कह दिया कि अब जहाजों को ईरान की नौसेना से न केवल अनुमति लेनी होगी, बल्कि यहाँ से गुजरने के लिए ‘टोल टैक्स’ भी देना होगा।

    दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ ईरानी सेना कार्रवाई कर रही थी, वहीं दूसरी तरफ ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने दावा किया था कि जलडमरूमध्य खुला रहेगा। यह विरोधाभासी बयान उस समय आया जब लेबनान में इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच युद्धविराम की घोषणा हुई थी। लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, पिछले कुछ ही दिनों में ईरान ने कम से कम 21 जहाजों को बलपूर्वक वापस भेज दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय नौवहन में अफरा-तफरी मच गई है।

    इस तनाव पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपना रुख कड़ा कर लिया है। हालांकि शुरुआत में उन्होंने बातचीत और नाकेबंदी खोलने के संकेत दिए थे, लेकिन अब उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिकी प्रतिबंध पूरी तरह जारी रहेंगे। ट्रंप का कहना है कि ईरान चाहे जो भी दबाव बनाने की कोशिश करे, जब तक कोई ठोस समझौता नहीं होता, अमेरिका झुकने वाला नहीं है। दो महाशक्तियों के बीच की यह तनातनी अब सीधे तौर पर समुद्री व्यापारिक जहाजों को अपना निशाना बना रही है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य की यह अशांति पूरी दुनिया के लिए खतरे की घंटी है, क्योंकि वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे मार्ग से गुजरता है। यदि ईरान इसी तरह जहाजों को रोकना और फायरिंग करना जारी रखता है, तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। फिलहाल, भारतीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए हैं और जहाजों को इस मार्ग पर अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    Brijesh Choudhary
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