केंद्र सरकार देश में नकली और घटिया गुणवत्ता वाले बीजों के कारोबार पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए संसद के आगामी सत्र में एक नया ‘बीज अधिनियम’ (Seed Bill) लाने की तैयारी कर रही है। वर्तमान में प्रभावी कानून काफी पुराना है, क्योंकि मौजूदा बीज अधिनियम वर्ष 1966 में बनाया गया था और बीज नियंत्रण आदेश 1983 में लागू हुआ था।
सरकार का मुख्य तर्क है कि लगभग 70 प्रतिशत बीज मौजूदा कानूनी दायरे से बाहर हैं और अलग-अलग राज्यों में प्रक्रियाएं भिन्न होने के कारण कड़े कदम उठाना मुश्किल हो रहा था। इसी कमी को दूर करने के लिए इस नए और आधुनिक कानून का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
इस प्रस्तावित कानून के तहत नकली और अवैध बीज का कारोबार करने वालों पर नकेल कसने के लिए अपराधों को कुल तीन श्रेणियों में बांटा गया है। पहली श्रेणी में मामूली उल्लंघन करने वाले कारोबारियों को रखा गया है, जिसमें पहली बार गलती पर केवल चेतावनी दी जाएगी।
दूसरी श्रेणी में जानबूझकर किए गए उल्लंघनों को शामिल किया गया है, जैसे प्रोडक्ट पर QR कोड या आवश्यक जानकारी न होना और गलत ब्रांडिंग करना। इन मामलों में पहली बार 1 लाख रुपये और दूसरी बार 2 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है।
तीसरी और सबसे गंभीर श्रेणी में नकली बीज बेचना, बिना पंजीकरण के कारोबार करना या जानबूझकर धोखाधड़ी जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। ऐसे गंभीर मामलों में दोषियों के लिए 30 लाख रुपये तक का भारी-भरकम जुर्माना और जेल की सजा का कड़ा प्रावधान रखा गया है।
पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सरकार ने प्रत्येक बीज पैकेट पर QR कोड लगाना अनिवार्य कर दिया है। इसके जरिए किसान स्कैन करके बीज की उत्पत्ति, निर्माता, प्रयोगशाला से मिली मंजूरी और उसकी पूरी आपूर्ति श्रृंखला को आसानी से ट्रैक कर सकेंगे।
नए कानून में यह भी सुनिश्चित किया गया है कि किसानों के पारंपरिक अधिकार किसी भी तरह से सीमित न हों। किसान अपने पारंपरिक बीजों का उपयोग, आदान-प्रदान और स्वेच्छा से बिक्री पहले की तरह कर सकेंगे और पारंपरिक बीजों का डिजिटल पंजीकरण अनिवार्य नहीं होगा।
वर्तमान में ट्रेसबिलिटी (उत्पत्ति का पता लगाने की व्यवस्था) की कमी के कारण बीज फेल होने पर जिम्मेदारी तय करना कठिन होता था। नए कानून के तहत एक व्यवस्थित राष्ट्रीय ऑनलाइन रजिस्टर बनाया जाएगा, जिससे केंद्र और राज्यों दोनों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया आसान हो जाएगी।
किसानों को राहत देने के लिए प्रत्येक राज्य में ‘सीड सिक्योरिटी फंड’ (बीज सुरक्षा कोष) की स्थापना का प्रावधान भी किया गया है। जुर्माने से वसूल की जाने वाली राशि इस फंड में जमा होगी, और बीज फेल होने पर जांच के बाद किसानों को 15 दिनों के भीतर मुआवजा दिया जाएगा।
इस महत्वपूर्ण बिल को संसद में पेश करने से पहले सरकार हितधारकों और किसानों के साथ व्यापक परामर्श कर रही है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में देश के 20 प्रमुख किसान संगठनों के साथ बैठक कर सुझाव लिए हैं, और माना जा रहा है कि सरकार इसे आगामी शीतकालीन सत्र में लाएगी।

