ओडिशा के एक सुदूर और घने जंगल के भीतर से वन्यजीव इतिहास और जैव विविधता के पन्नों से एक ऐसी चौंकाने वाली और रोमांचक खबर सामने आई है, जिसने देश-दुनिया के वैज्ञानिकों, जीवविज्ञानियों और वन्यजीव प्रेमियों को गहरी सोच में डाल दिया है। खोजकर्ताओं और स्थानीय वन विभाग की टीमों को इस जंगल में पांच ऐसे विशालकाय जीव मिले हैं जिन्हें देखकर हर कोई हक्का-बक्का रह गया है। इन जीवों को स्थानीय भाषा और वैज्ञानिक शब्दावली में ‘महावानर’ या विशाल प्राइमेट्स (Great Apes) के रूप में देखा जा रहा है, जिनकी शारीरिक बनावट और हरकतें इंसानों से बेहद मिलती-जुलती हैं।
सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि शुरुआती वैज्ञानिक परीक्षणों और फील्ड स्टडी में यह बात सामने आई है कि इन जीवों का डीएनए (DNA) इंसानों से लगभग 95 प्रतिशत तक मेल खाता है। इस अद्भुत और अप्रत्याशित खोज के बाद से भारतीय वन्यजीव अनुसंधान संस्थानों में भारी हलचल मच गई है और इस बात पर गहन माथापच्ची शुरू हो गई है कि आखिर हजारों किलोमीटर दूर समंदर और महाद्वीपों को पार करके ये दुर्लभ जीव इंडोनेशिया के जंगलों से निकलकर भारत के इस कोने तक कैसे पहुंचे।
जीवविज्ञान और प्राइमेटोलॉजी के जानकारों के मुताबिक, इस तरह के महावानर या ओरंगुटान (Orangutans) जैसे जीव मुख्य रूप से दक्षिण-पूर्व एशिया के घने वर्षावनों, विशेष तौर पर इंडोनेशिया के सुमात्रा और बोर्नियो जैसे द्वीपों पर ही पाए जाते हैं। भारत के प्राकृतिक आवास और पारिस्थितिकी तंत्र में इस प्रजाति के बड़े वानरों का कोई ऐतिहासिक या प्राकृतिक इतिहास नहीं रहा है। ऐसे में ओडिशा के जंगलों में अचानक पांच महावानरों का एक साथ जीवित अवस्था में मिलना किसी चमत्कार से कम नहीं है, जिसने जीवविज्ञानियों को हैरान कर दिया है।
वन्यजीव विशेषज्ञों की एक विशेष टीम वर्तमान में इन जीवों के स्वास्थ्य, खान-पान और व्यवहार की लगातार निगरानी कर रही है। प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि या तो ये जीव किसी अवैध वन्यजीव तस्करी (Wildlife Smuggling) के रैकेट के चंगुल से छूटकर या बचाए जाने के बाद इस जंगल तक पहुंचे हैं, या फिर जलवायु परिवर्तन और मानवीय दखल के चलते किसी अंतरराष्ट्रीय मालवाहक पोत के जरिए महासमुद्र को पार करते हुए यहां तक आ पहुंचे हैं।
इंडोनेशिया के उष्णकटिबंधीय जंगलों से लेकर भारत के पूर्वी तट पर स्थित ओडिशा के जंगलों तक की दूरी हजारों किलोमीटर की है, जिसमें विशाल महासागर, समुद्र तट और दुर्गम भौगोलिक बाधाएं शामिल हैं। एक या दो नहीं बल्कि पांच महावानरों का इस लंबी और खतरनाक यात्रा को जीवित तय करना किसी अद्भुत साहसिक कहानी जैसा प्रतीत होता है, जो कई अनछुए पहलुओं की ओर इशारा करता है।
पर्यावरणविदों का मानना है कि यदि ये जीव तस्करी का शिकार हुए थे, तो तस्करों द्वारा इन्हें समुद्री मार्ग से भारत लाने के दौरान या तो इन्हें जंगल में छोड़ दिया गया होगा या फिर ये किसी तरह पिंजरे या कंटेनर से भाग निकलने में कामयाब रहे होंगे। हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी के समुद्री रास्तों से होते हुए इन जीवों का भारतीय उपमहाद्वीप के जंगलों तक पहुंचना अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी के एक बड़े और काले नेटवर्क की ओर भी साफ इशारा करता है।
इन महावानरों की सबसे बड़ी खूबी उनका इंसानों के साथ आनुवंशिक (Genetic) और शारीरिक समानता होना है, जो शोधकर्ताओं के लिए विशेष अध्ययन का विषय बना हुआ है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इनके लंबे हाथ, ताकतवर शरीर और चेहरे के भाव शोधकर्ताओं को यह सोचने पर मजबूर कर रहे हैं कि विकास क्रम (Evolution) के किस पड़ाव पर इंसानों और इन प्राइमेट्स के पूर्वज एक जैसे हुआ करते थे।
ओडिशा के जंगलों में इनका इस तरह से जीवित मिलना जैव विविधता के लिहाज से भले ही एक रोमांचक खोज हो, लेकिन भारतीय जंगलों के पर्यावरण और जलवायु में खुद को ढालने के लिए इन जीवों को किन-किन संघर्षों से गुजरना पड़ा होगा, यह आने वाले वैज्ञानिक अध्ययनों और विस्तृत रिपोर्ट्स में ही स्पष्ट हो पाएगा।
ओडिशा के जंगलों में मिले इन पांच महावानरों की इस घटना ने देश की सीमाओं और बंदरगाहों पर होने वाली वन्यजीवों की अवैध तस्करी की पोल खोलकर रख दी है। भारत के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (Wildlife Protection Act) के तहत इस प्रकार की विदेशी प्रजातियों के अवैध प्रवेश और रखरखाव पर बेहद कड़ी पाबंदियां लगाई गई हैं।
वन विभाग और केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय अब इस बात की उच्चस्तरीय जांच करवा रहा है कि आखिर ये जीव किस रास्ते से और किसके संरक्षण में भारत की सीमा में दाखिल हुए। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इन वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास यानी इंडोनेशिया के जंगलों या किसी सुरक्षित पुनर्वास केंद्र में वापस भेजने की प्रक्रिया पर तुरंत विचार किया जाना चाहिए, क्योंकि भारतीय जंगलों का पारिस्थितिकी तंत्र इन विदेशी जीवों के लिए लंबे समय तक अनुकूल साबित नहीं हो सकता।

