मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 10 हजार 783 करोड़ रुपए की लागत वाली तीन महत्वपूर्ण मल्टीट्रैकिंग रेल परियोजनाओं को मंजूरी दिए जाने का खुले दिल से स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं में बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड तीसरी लाइन और कटनी-पेंड्रा रोड चौथी लाइन का निर्माण छत्तीसगढ़ के समग्र विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इन पहलों से न केवल प्रदेश के रेल नेटवर्क की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, बल्कि आम यात्रियों के लिए सुविधाओं का भी अभूतपूर्व विस्तार होगा।
मुख्यमंत्री साय ने इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश भर में आधुनिक और मजबूत रेल इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण का कार्य अत्यधिक तीव्र गति से चल रहा है। छत्तीसगढ़ को इस राष्ट्रीय प्रगति का लगातार प्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है, जो राज्य के नागरिकों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने में मददगार साबित हो रहा है।
नई मल्टीट्रैकिंग परियोजनाएं ‘विकसित भारत-विकसित छत्तीसगढ़’ के महत्वाकांक्षी संकल्प को मूर्तरूप देने में अहम भूमिका निभाएंगी। यह पहल प्रदेश के भीतर आर्थिक गतिविधियों को नई ऊर्जा देगी, औद्योगिक विकास की रफ्तार को बढ़ाएगी और राज्य के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसरों के द्वार खोलेगी।
केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत इन तीनों महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं में खड़गपुर-झारसुगुड़ा (बागदेही) चौथी लाइन, कटनी-पेंड्रा रोड चौथी लाइन और बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड तीसरी लाइन शामिल हैं। इन सभी परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत 10 हजार 783 करोड़ रुपए निर्धारित की गई है, जिन्हें वर्ष 2029-30 तक तय समयसीमा में पूर्ण करने की व्यापक योजना बनाई गई है।
इन विशाल परियोजनाओं के पूरा होने से पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्य के कुल 14 जिलों में रेल कनेक्टिविटी अत्यधिक मजबूत होगी। इसके माध्यम से भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 656 किलोमीटर की अतिरिक्त वृद्धि होगी, जिससे लगभग 4 हजार 790 गांवों और करीब 56 लाख की विशाल आबादी को सुगम परिवहन का लाभ मिलेगा।
बिलासपुर और पेंड्रा के बीच बनने वाले नए रेल कॉरिडोर छत्तीसगढ़ की औद्योगिक रीढ़ को और अधिक सशक्त बनाएंगे। अतिरिक्त लाइनों के चालू हो जाने से ट्रेनों का परिचालन बेहद सुगम हो जाएगा, जिससे रेल यातायात का भारी दबाव कम होगा और यात्री तथा मालगाड़ियों की आवाजाही अधिक भरोसेमंद और समयबद्ध हो सकेगी।
कोयला, सीमेंट, लोहा और इस्पात जैसे भारी खनिजों के परिवहन की दृष्टि से भी ये परियोजनाएं अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होंगी। मल्टीट्रैकिंग के जरिए रेल नेटवर्क की माल ढुलाई क्षमता में भारी बढ़ोतरी होगी, जिससे प्रतिवर्ष लगभग 27 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता का विकास होगा और उद्योगों को निर्बाध लॉजिस्टिक्स सहायता मिल सकेगी।

