राजधानी रायपुर में स्वच्छता व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा खुले में कचरा फेंकने की प्रवृत्ति पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए नगर निगम प्रशासन ने अब बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। शहर के विभिन्न हिस्सों में सड़कों, खाली भूखंडों, नालियों और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर कचरा फेंकने वालों की अब खैर नहीं होगी, क्योंकि नगर निगम द्वारा इन स्थानों पर पैनी नजर रखने की पुख्ता तैयारी कर ली गई है।
इस विशेष अभियान के तहत रायपुर के सभी 70 वार्डों में निगरानी बढ़ाने के लिए लगभग 160 सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। नगर निगम के उपायुक्त जसदेव सिंह बाबरा ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि इन कैमरों को स्थापित करने के लिए वर्तमान में टेंडर प्रक्रिया तेजी से चल रही है। शुरुआत में पहले चरण के रूप में लगभग 160 प्रमुख स्थानों को कवर किया जाएगा, जहां सबसे ज्यादा गंदगी फैलाई जाती है।
शहर की बदलती जरूरतों और मांग के हिसाब से भविष्य में इन सीसीटीवी कैमरों की संख्या में और भी विस्तार किया जाएगा। इस पूरी योजना के सुचारू संचालन के लिए लगभग एक करोड़ रुपये के तीन साल के एक बड़े ठेके की प्रक्रिया गतिमान है। इस अनुबंध के दायरे में केवल कैमरों की खरीद या स्थापना ही नहीं, बल्कि उनका सफल ऑपरेशन, नियमित मेंटेनेंस और कंट्रोल रूम का संपूर्ण संचालन भी शामिल रहेगा।
नगर निगम की टीम ने उन संवेदनशील और हॉटस्पॉट स्थानों को पहले ही चिन्हित कर लिया है, जहां लोग नियमों को ताक पर रखकर अक्सर खुले में कचरा फेंकते हैं। इन्हीं चिन्हित ब्लैक स्पॉट्स पर हाई-रिज़ॉल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। इन कैमरों की लाइव फीड के माध्यम से सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फैलाने वालों की आसानी से पहचान की जाएगी और फिर उनके खिलाफ ठोस कानूनी व आर्थिक कार्रवाई की जाएगी।
नगर निगम के कड़े स्वच्छता नियमों के तहत कचरा प्रबंधन के उल्लंघनों के लिए अपराध की प्रकृति के आधार पर 50 रुपये से लेकर 50,000 रुपये तक के भारी-भरकम जुर्माने का प्रावधान तय किया गया है। जैसे की – डायपर, सैनिटरी पैड और विशेष देखभाल वाले बायोमेडिकल कचरे को लापरवाही से खुले में फेंकने पर पहली बार 100 रुपये और दूसरी बार 200 रुपये का जुर्माना वसूला जाएगा।
इसी तरह घरेलू बगीचों से निकलने वाले पत्तों या घास जैसी सामग्रियों का निगम के तय दिशा-निर्देशों के विरुद्ध निपटान करने पर पहली बार 500 और दोबारा ऐसा करने पर 750 रुपये का दंड देना होगा। वहीं किसी भी गली, खुले मैदान, घर के बाहर, नाली, तालाब या नदी के किनारे कचरा फेंकने, उसे जलाने या जमीन में गाड़ने पर पहली बार 500 रुपये और दूसरी बार 750 रुपये का जुर्माना तय किया गया है।
व्यासायिक और बड़े आयोजनों के लिए भी कड़े नियम लागू किए गए हैं। रेहड़ी-ठेला संचालकों द्वारा गीला और सूखा कचरा अलग-अलग न देने या खुले में फेंकने पर पहली बार 200 और दूसरी बार 400 रुपये का जुर्माना लगेगा। होटल और रेस्टोरेंट संचालकों के लिए यह जुर्माना पहली बार 2,000 रुपये और दूसरी बार 3,000 रुपये है। इसके अलावा 100 से अधिक लोगों के किसी भी सार्वजनिक समारोह की कम से कम तीन दिन पूर्व नगर निगम को सूचना न देने पर भी पहली बार 2,000 और दूसरी बार 3,000 रुपये का दंड भुगतना होगा।
सबसे बड़े जुर्माने बड़े संस्थानों और कचरा उठाने वाली एजेंसियों के लिए निर्धारित किए गए हैं। 5,000 वर्गमीटर से बड़े क्षेत्रफल वाली गेटेड सोसाइटियों, संस्थानों या बल्क वेस्ट जनरेटर (BWG) द्वारा खुले में कचरा फेंकने पर पहली बार 20,000 रुपये और दूसरी बार 30,000 रुपये का भारी जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं कचरा एकत्रित करने वाली किसी एजेंसी या ठेकेदार द्वारा कचरा जलाए जाने जैसे गंभीर कृत्य पर पहली बार 25,000 रुपये और दूसरी बार 50,000 रुपये का कड़ा दंड वसूला जाएगा।

