छत्तीसगढ़ में खेलों के सर्वांगीण विकास और अधोसंरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए प्रदेश में पहली बार ‘नेशनल गेम्स’ के आयोजन की तैयारियां शुरू कर दी हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में सिविल लाइन स्थित न्यू सर्किट हाउस में छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ की एक उच्चस्तरीय बैठक संपन्न हुई। इस महत्वपूर्ण बैठक में संघ के उपाध्यक्ष व मंत्री केदार कश्यप, सांसद विजय बघेल और महासचिव डॉ. विक्रम सिसोदिया सहित कई प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे।
बैठक का मुख्य केंद्रबिंदु छत्तीसगढ़ को 40वें नेशनल गेम्स की मेजबानी दिलाना रहा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में खेल सुविधाओं के विस्तार के साथ अब बड़े राष्ट्रीय आयोजनों की मेजबानी की दिशा में गंभीरता से आगे बढ़ने का समय आ गया है। इस मेगा इवेंट के कुछ मुकाबलों को बस्तर क्षेत्र से भी जोड़े जाने की योजना है, जिससे वहां के युवाओं को प्रेरणा मिलने के साथ-साथ देश-दुनिया के सामने बस्तर की एक नई और सकारात्मक तस्वीर प्रस्तुत की जा सकेगी।

ग्रामीण और वनांचलों की नैसर्गिक खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए सरकार ने विशेष रणनीतिक योजनाएं बनाई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के दूरस्थ अंचलों में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, बस उन्हें समय पर पहचान कर आधुनिक संसाधनों से लैस करने की आवश्यकता है। जशपुर अंचल और विशेषकर पहाड़ी कोरवा समुदाय में तीरंदाजी की पैतृक और स्वाभाविक क्षमता को देखते हुए पंडरापाठ में लगभग 20 से 25 करोड़ रुपए की लागत से एक आधुनिक आर्चरी अकादमी की स्थापना की जा रही है।
राजधानी रायपुर में भी खेलों के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए भारी-भरकम निवेश किया जा रहा है। रायपुर में लगभग 60 करोड़ रुपए की लागत से एक अत्याधुनिक आर्चरी अकादमी का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इसके अलावा, रायपुर, रायगढ़ और कुनकुरी में आधुनिक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का निर्माण भी किया जा रहा है, ताकि राज्य के खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण, विशेषज्ञ प्रशिक्षकों और आवश्यक अभ्यास की बेहतरीन सुविधाएं मिल सकें।
खेलों को केवल प्रतियोगिताओं और पदकों तक सीमित न रखते हुए इसे युवाओं में अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा का माध्यम बताया गया है। इसी सोच के तहत राज्य सरकार ने ‘खेल अलंकरण समारोह’ की पुनः शुरुआत की है, जिसके माध्यम से उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित कर आर्थिक सहायता और शासकीय सेवाओं में अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खेलो इंडिया विजन से प्रेरणा लेते हुए सरकार खिलाड़ियों का निरंतर उत्साहवर्धन कर रही है।
प्रदेश में खेल गतिविधियों और अधोसंरचना के विकास को गति देने के लिए उद्योग जगत को साथ जोड़ने की अनूठी पहल की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय मंत्री के रूप में अपने अनुभव के आधार पर उन्होंने उद्योग और खेल समन्वय के सकारात्मक परिणाम देखे हैं। यदि छत्तीसगढ़ के बड़े उद्योग समूह विभिन्न खेल संघों के साथ जुड़कर आर्थिक सहयोग प्रदान करें, तो खिलाड़ियों के प्रशिक्षण और आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता में अभूतपूर्व सहायता मिलेगी।
शासन और खेल संगठनों के बीच किसी भी प्रकार के संवादहीनता को दूर करने के लिए विशेष प्रशासनिक व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री सचिवालय के एक वरिष्ठ अधिकारी को छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के साथ विशेष रूप से समन्वय स्थापित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि खेल संघों के प्रस्तावों और आवश्यकताओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित हो सके। इसके साथ ही, खेल गतिविधियों के विकेंद्रीकरण के लिए प्रदेश के अन्य जिलों में भी नए जिला ओलंपिक संघों का गठन करने के लिए एक विशेष समिति बनाई जाएगी।
क्षेत्रीय स्तर पर खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए बस्तर ओलंपिक और सरगुजा ओलंपिक का आयोजन मील का पत्थर साबित हो रहा है। सरकार ने घोषणा की है कि ‘बस्तर ओलंपिक’ का आयोजन अब प्रत्येक वर्ष नियमित रूप से किया जाएगा, जिससे दूरदराज के हजारों युवाओं को अपनी कला दिखाने का एक बड़ा मंच मिल रहा है। ‘खेल उत्कर्ष मिशन’ के माध्यम से गांवों से लेकर शहरों तक हर प्रतिभाशाली खिलाड़ी को आगे बढ़ने के लिए समान अवसर और संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
बैठक के अंत में संघ के महासचिव डॉ. विक्रम सिसोदिया ने पिछले सत्र का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया और आगामी 23 जून को ‘ओलंपिक दिवस’ के भव्य आयोजन की रूपरेखा रखी। वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि वनांचल के युवा तीरंदाजी के साथ-साथ मलखम्ब जैसे पारंपरिक खेलों में भी राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। इस पूरी बैठक और कार्ययोजना से यह स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ आने वाले समय में खेल के क्षेत्र में एक नया और सशक्त राष्ट्रीय हब बनकर उभरने के लिए पूरी तरह तैयार है।

