ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने मध्य पूर्व के समीकरणों को एक बार फिर गरमा दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माइल बघाई ने एक कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि पिछले 24 दिनों से दोनों देशों के बीच किसी भी प्रकार की कूटनीतिक बातचीत नहीं हुई है। बघाई ने अमेरिका को एक अविश्वसनीय पक्ष करार देते हुए आरोप लगाया कि वह कूटनीति के प्रयासों को बाधित कर रहा है और जानबूझकर संघर्ष को पूरे क्षेत्र में फैलाने की कोशिश कर रहा है।
ईरान ने इस मौजूदा स्थिति को “अवैध युद्ध” की संज्ञा दी है और कहा है कि उसने संघर्ष की शुरुआत नहीं की। प्रवक्ता के अनुसार, ईरान पर लगातार हमले किए जा रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत उसे अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इजरायल और अमेरिका द्वारा नागरिक ठिकानों को निशाना बनाने की धमकी देना युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है, जिससे ईरान की व्यवस्था कतई विचलित नहीं होने वाली है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच भारत के लिए एक सकारात्मक संदेश भी सामने आया है। ईरान ने भारत के साथ अपने संबंधों को “सकारात्मक और सम्मानजनक” बताया है। बघाई ने जोर देकर कहा कि भारत उन देशों की सूची में शामिल नहीं है जो हमलावरों की मदद कर रहे हैं। यह बयान भारत की उस संतुलित विदेश नीति की पुष्टि करता है, जिसके तहत वह क्षेत्र में शांति का पक्षधर रहा है और किसी भी सैन्य गुटबाजी से दूर रहा है।
खासकर रणनीतिक और व्यापारिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर भी बड़ी जानकारी साझा की गई है। ईरान ने बताया कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से जुड़ी आवाजाही और सुरक्षा को लेकर भारत के साथ उसकी बातचीत निरंतर जारी है। चूंकि यह मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति की जीवन रेखा माना जाता है, इसलिए इस पर दोनों देशों का संवाद क्षेत्र की आर्थिक स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
पड़ोसी देशों के संदर्भ में ईरान ने पाकिस्तान के साथ अपने रिश्तों को स्थिर बताया और कहा कि पड़ोसी मुल्क तनाव कम करने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने ओमान और कुछ यूरोपीय देशों के माध्यम से चल रही मध्यस्थता प्रक्रियाओं की विफलता के लिए सीधे तौर पर अमेरिका की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। ईरान का मानना है कि बाहरी हस्तक्षेप की वजह से ही शांति के प्रयास सफल नहीं हो पा रहे हैं।
अंततः, प्रवक्ता ने संदेश दिया कि ईरान का नेतृत्व पूरी तरह सक्रिय है और देश की आंतरिक व्यवस्था बेहद मजबूत है। उन्होंने साफ कर दिया कि ईरान किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है और अपनी सुरक्षा के लिए जब तक आवश्यक होगा, तब तक जवाबी कार्रवाई करता रहेगा। यह तेवर स्पष्ट करते हैं कि आने वाले दिनों में क्षेत्र में तनाव कम होने के बजाय और भी जटिल रूप ले सकता है।

