अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने अब विश्व के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक जलमार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), को अपनी चपेट में ले लिया है। अमेरिकी विदेश संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) ने हाल ही में दुनिया भर की शिपिंग कंपनियों को एक कड़ी चेतावनी जारी की है। इस चेतावनी में स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई भी कंपनी सुरक्षित मार्ग के बदले ईरान को किसी भी प्रकार का भुगतान करती है, तो उसे अमेरिका के कड़े आर्थिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा।
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग को ऐसी पुख्ता खबरें मिली हैं कि ईरानी अधिकारी इस जलमार्ग से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों को डरा-धमका रहे हैं। ईरान द्वारा जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के नाम पर ‘टोल’ वसूला जा रहा है, जिसे अमेरिका ने अवैध वसूली करार दिया है। विभाग ने साफ किया है कि यह पाबंदी न केवल अमेरिकी नागरिकों बल्कि विदेशी कंपनियों और वित्तीय संस्थानों पर भी समान रूप से लागू होगी।
भुगतान के तरीकों को लेकर अमेरिका ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। OFAC की एडवाइजरी के अनुसार, प्रतिबंधों से बचने के लिए किसी भी “अप्रत्यक्ष” तरीके का इस्तेमाल भी भारी पड़ सकता है। इसमें न केवल नकद राशि, बल्कि डिजिटल करेंसी, क्रिप्टोकरेंसी, वस्तु-आधारित अदला-बदली, या किसी ईरानी संस्था जैसे ‘ईरान रेड क्रिसेंट सोसाइटी’ या ईरानी दूतावासों को दिए गए दान को भी अवैध लेनदेन की श्रेणी में रखा गया है।
यह विवाद तब और गहरा गया जब ईरान ने 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते टकराव के बाद इस जलमार्ग को सामान्य यातायात के लिए लगभग बंद कर दिया। इसके बाद, ईरान ने अपनी तटरेखा के पास से कुछ वैकल्पिक मार्ग खोले और वहां से गुजरने वाले जहाजों से पैसे वसूलना शुरू कर दिया। इस “टोलबूथ” जैसी व्यवस्था ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए एक नया संकट खड़ा कर दिया है, क्योंकि दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल व्यापार इसी रास्ते से होता है।
अमेरिका की यह चेतावनी केवल कागजी नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक मजबूत वित्तीय घेराबंदी भी है। यदि कोई विदेशी बैंक या वित्तीय संस्थान इन प्रतिबंधित लेनदेन को संसाधित (process) करता है, तो अमेरिका उसके लिए अपनी बैंकिंग प्रणाली के दरवाजे हमेशा के लिए बंद कर सकता है। इसका सीधा मतलब यह है कि ईरान के साथ सहयोग करने वाली किसी भी कंपनी को वैश्विक व्यापार से पूरी तरह बाहर कर दिया जाएगा।
जवाब में, अमेरिका ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए 13 अप्रैल से ईरान की नौसैनिक नाकाबंदी (Naval Blockade) लागू कर दी है। इस नाकाबंदी का मुख्य उद्देश्य ईरानी तेल टैंकरों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में जाने से रोकना है। अमेरिका का मानना है कि इससे ईरान की पहले से ही कमजोर अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा और वह अपने आवश्यक तेल राजस्व से वंचित हो जाएगा, जिसका उपयोग वह सैन्य गतिविधियों के लिए करता है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने हाल ही में जानकारी दी है कि इस नाकाबंदी के शुरू होने के बाद से अब तक 45 वाणिज्यिक जहाजों को वापस जाने के लिए मजबूर किया गया है। यह कार्रवाई दर्शाती है कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान के बढ़ते नियंत्रण को चुनौती देने के लिए पूरी तरह तैयार है। दोनों देशों के बीच जारी यह शक्ति-प्रदर्शन अब वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है।
कुल मिलाकर, होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुआ यह गतिरोध वैश्विक अर्थव्यवस्था को अस्थिर कर सकता है। एक तरफ जहां ईरान रणनीतिक रूप से जहाजों को नियंत्रित कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका वित्तीय और सैन्य दबाव के जरिए ईरान को अलग-थलग करने की कोशिश में है। आने वाले समय में शिपिंग कंपनियों के लिए इस मार्ग से गुजरना एक बड़ा जोखिम भरा फैसला होगा, जिसमें एक तरफ सुरक्षा का खतरा है तो दूसरी तरफ कड़े आर्थिक प्रतिबंधों की मार।

