तमिलनाडु की राजनीति में दशकों से चले आ रहे द्रविड़ किलों के समीकरण इस बार ध्वस्त होते नजर आ रहे हैं। एक्सिस माय इंडिया (Axis My India) के ताजा एग्जिट पोल ने पूरे देश को चौंका दिया है, जिसके अनुसार अभिनेता विजय के नेतृत्व वाली ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) राज्य में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर सकती है। 234 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की आवश्यकता है और एग्जिट पोल के आंकड़े बताते हैं कि विजय की पार्टी 98 से 120 सीटें जीतकर सत्ता की दहलीज पर खड़ी है।
मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ DMK+ गठबंधन के लिए यह चुनाव किसी कड़े संघर्ष से कम नहीं रहा। एग्जिट पोल के मुताबिक, डीएमके और उसके सहयोगियों (कांग्रेस, वीसीके, वामपंथी दल) को 92 से 110 सीटें मिलने का अनुमान है। हालांकि स्टालिन सरकार का प्रदर्शन पूरी तरह खराब नहीं रहा, लेकिन सत्ता विरोधी लहर और ‘तीसरी ताकत’ के रूप में विजय के उभार ने उनके बहुमत के गणित को बिगाड़ दिया है। गठबंधन के पास अभी भी एक मजबूत वोट बैंक है, लेकिन वह जादुई आंकड़े से थोड़ा पीछे रह सकता है।
सबसे चौंकाने वाले आंकड़े मुख्यमंत्री की पसंद को लेकर सामने आए हैं। एग्जिट पोल में 37% जनता ने अभिनेता विजय को मुख्यमंत्री के रूप में अपनी पहली पसंद बताया है, जबकि वर्तमान मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन 35% लोकप्रियता के साथ दूसरे स्थान पर खिसक गए हैं। यह पहली बार है जब किसी नए राजनीतिक दल के नेता ने सीधे तौर पर द्रविड़ राजनीति के स्थापित दिग्गजों को चुनौती दी है और लोकप्रियता के ग्राफ में उन्हें पीछे छोड़ दिया है।

वोट प्रतिशत के मामले में भी मुकाबला कांटे का दिख रहा है। आंकड़ों के अनुसार, DMK+ और TVK दोनों को लगभग 35-35 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है। वोटों का यह समान बंटवारा दर्शाता है कि तमिलनाडु का युवा और तटस्थ मतदाता इस बार पारंपरिक राजनीति से हटकर एक नए विकल्प की ओर मुड़ गया है। विजय की पार्टी ने विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों और युवा वोटरों के बीच गहरी पैठ बनाई है, जो इस त्रिकोणीय मुकाबले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू साबित हुआ है।
दूसरी ओर, अन्नाद्रमुक (AIADMK+) गठबंधन के लिए यह एग्जिट पोल निराशाजनक संकेत दे रहा है। ई.के. पलानीस्वामी के नेतृत्व वाली अन्नाद्रमुक, जिसमें भाजपा और पीएमके जैसे दल शामिल हैं, केवल 22 से 32 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है। गठबंधन को मात्र 23% वोट मिलने का अनुमान है, जो यह बताता है कि राज्य में मुख्य विपक्ष की भूमिका अब अन्नाद्रमुक के हाथ से निकलकर विजय की टीवीके के पास जा चुकी है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई को भी मुख्यमंत्री की पसंद के रूप में केवल 2% समर्थन मिला है।
राज्य के अन्य छोटे दलों की स्थिति भी इस बड़े मुकाबले में धुंधली पड़ गई है। सीमांतन के नेतृत्व वाली नाम तमिलर काची (NTK) को लगभग 3% वोट मिलने का अनुमान है, जबकि अन्य दलों के खाते में 4% वोट जा सकते हैं। एग्जिट पोल के ये रुझान साफ करते हैं कि तमिलनाडु अब द्विध्रुवीय राजनीति (DMK vs AIADMK) से निकलकर एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है, जहाँ क्षेत्रीय अस्मिता और फिल्मी लोकप्रियता का नया मिश्रण सत्ता तय कर रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि ये नतीजे वास्तविक परिणामों में तब्दील होते हैं, तो यह भारतीय राजनीति की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक होगी। एम.जी. रामचंद्रन और जे. जयललिता के बाद विजय तीसरे ऐसे अभिनेता होंगे जिन्होंने पर्दे की लोकप्रियता को सीधे सत्ता की कुर्सी तक पहुंचाया है। हालांकि, बहुमत के करीब होने के बावजूद यदि टीवीके 118 के आंकड़े को नहीं छू पाती है, तो तमिलनाडु में ‘हंग असेंबली’ (त्रिशंकु विधानसभा) की स्थिति पैदा हो सकती है, जिससे छोटे दल ‘किंगमेकर’ की भूमिका में आ जाएंगे।
फिलहाल, सभी की निगाहें मतगणना के दिन पर टिकी हैं। क्या विजय वास्तव में तमिलनाडु के नए ‘थलापति’ बनकर उभरेंगे या एम.के. स्टालिन का अनुभव और गठबंधन की मजबूती सत्ता विरोधी लहर को मात देने में सफल होगी? एक्सिस माय इंडिया का यह एग्जिट पोल निश्चित रूप से राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर चुका है, जिसने पारंपरिक दलों को अपनी रणनीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है।

