पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण का मतदान आज सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। मतदान खत्म होने के तुरंत बाद विभिन्न सर्वे एजेंसियों के ‘एग्जिट पोल’ के आंकड़े सामने आने लगे हैं, जिन्होंने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। इन आंकड़ों के अनुसार, बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच जबरदस्त मुकाबला देखने को मिल रहा है। जहाँ कुछ सर्वे टीएमसी की वापसी की भविष्यवाणी कर रहे हैं, वहीं कई एग्जिट पोल बीजेपी को पहली बार बंगाल की सत्ता के शिखर पर बैठाते हुए दिखा रहे हैं।
इस बार के विधानसभा चुनाव न केवल राजनीतिक दांव-पेच बल्कि भारी मतदान प्रतिशत के लिए भी याद रखे जाएंगे। चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल के दूसरे चरण में शाम 5 बजे तक लगभग 89.99% मतदान दर्ज किया गया है, जबकि पहले चरण में यह आंकड़ा 93% के करीब था। मतदान का यह स्तर दर्शाता है कि जनता में अपने मताधिकार को लेकर भारी उत्साह रहा है। बंगाल ही नहीं, बल्कि तमिलनाडु, असम, केरल और पुदुचेरी में भी मतदान के पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त हो गए हैं, जिससे चुनावी परिणाम और भी दिलचस्प हो गए हैं।
पश्चिम बंगाल की बात करें तो यहाँ की सभी 294 सीटों पर इस बार मुकाबला त्रिकोणीय होने के बजाय सीधे तौर पर ‘दीदी’ और ‘मोदी’ के इर्द-गिर्द सिमटा नजर आ रहा है। भारतीय जनता पार्टी इस बार अकेले दम पर सभी 294 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि 2021 के चुनावों में उसने छोटे सहयोगियों के साथ गठबंधन किया था। शुरुआती रुझानों और महा-एग्जिट पोल की मानें तो सत्ता विरोधी लहर और परिवर्तन के नारों के बीच बंगाल का मतदाता दो हिस्सों में बंटा हुआ नजर आ रहा है, जिसका अंतिम फैसला 4 मई को ही स्पष्ट होगा।
असम विधानसभा की सभी 126 सीटों पर भी मतदान की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। यहाँ लगभग 85.5% मतदाताओं ने अपने वोट डाले। अधिकांश एग्जिट पोल असम में एक बार फिर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार बनने की ओर इशारा कर रहे हैं। हालांकि, कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन ने भी कड़ी चुनौती पेश की है, लेकिन सर्बानंद सोनोवाल और हिमंत बिस्वा सरमा की जोड़ी का प्रभाव पोल के नतीजों में साफ झलक रहा है, जो विकास और सुरक्षा के मुद्दे पर वोट मांग रहे थे।
दक्षिण भारत के राज्यों में भी स्थिति काफी रोमांचक बनी हुई है। तमिलनाडु में 85.1% की रिकॉर्ड वोटिंग हुई है, जहाँ डीएमके (DMK) और एआईएडीएमके (AIADMK) के बीच परंपरागत जंग के साथ-साथ इस बार ‘थलपति’ विजय की पार्टी टीवीके (TVK) ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। यहाँ एग्जिट पोल द्रमुक गठबंधन को थोड़ी बढ़त दे रहे हैं, लेकिन भारी मतदान प्रतिशत किसी बड़े उलटफेर की ओर भी इशारा कर रहा है। मतदाताओं की लंबी कतारों ने राजनीतिक पंडितों को अनुमान बदलने पर मजबूर कर दिया है।
केरल, जहाँ अमूमन हर पांच साल में सत्ता परिवर्तन की परंपरा रही है, वहां इस बार 140 सीटों पर 75 से 78 प्रतिशत के बीच मतदान हुआ है। राज्य में एलडीएफ (LDF) और यूडीएफ (UDF) के बीच कड़ा मुकाबला है। केरल का मतदाता इस बार स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति को ध्यान में रखकर भी वोट करता दिखा है। एग्जिट पोल के अनुसार यहाँ मामला काफी फंसा हुआ है, लेकिन कांग्रेस गठबंधन को थोड़ी उम्मीदें ज्यादा नजर आ रही हैं।
केंद्र शासित प्रदेश पुदुचेरी में लोकतंत्र का महापर्व सबसे अलग रहा, जहाँ 89.87 प्रतिशत वोटिंग हुई। यह वहां के चुनावी इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। पुदुचेरी की छोटी लेकिन महत्वपूर्ण विधानसभा में मतदाताओं ने जिस तरह से बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है, उससे संकेत मिलता है कि जनता स्थिर सरकार के पक्ष में है। यहाँ एनडीए और कांग्रेस समर्थित गठबंधन के बीच मुकाबला है, जिसमें फिलहाल एनडीए का पलड़ा भारी दिख रहा है।
अंततः, एग्जिट पोल चाहे जो भी संकेत दें, यह केवल मतदाताओं की राय पर आधारित एक अनुमान मात्र है। अक्सर देखा गया है कि वास्तविक नतीजे इन अनुमानों से काफी भिन्न होते हैं। पश्चिम बंगाल सहित पांचों राज्यों की किस्मत अब इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) में बंद हो चुकी है। अब सबकी निगाहें 4 मई के मतगणना दिवस पर टिकी हैं, जब यह साफ होगा कि जनता ने अगले पांच वर्षों के लिए किस पर भरोसा जताया है और इन रिकॉर्ड मतदानों का असल विजेता कौन है।

