पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के सभी चरणों का मतदान संपन्न होने के बाद देश भर की निगाहें एग्जिट पोल के नतीजों पर टिकी हुई हैं। जहां विभिन्न सर्वेक्षण एजेंसियां राज्य में कड़े मुकाबले या बीजेपी की बढ़त का अनुमान लगा रही हैं, वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इन आंकड़ों को पूरी तरह सिरे से खारिज कर दिया है। ममता बनर्जी ने एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी जीत का प्रचंड दावा करते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) राज्य की 294 सीटों में से 226 से ज्यादा सीटें जीतकर एक बार फिर सत्ता में वापसी करने जा रही है।
ममता बनर्जी ने अपने संबोधन में सबसे पहले बंगाल की जनता का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि चिलचिलाती धूप, विभिन्न प्रकार के दबाव, जुल्म और डर के माहौल के बावजूद जिस तरह से लोगों ने लंबी कतारों में खड़े होकर अपने मताधिकार का प्रयोग किया, वह लोकतंत्र की जीत है। उन्होंने मतदाताओं के जज्बे को ‘सलाम’ करते हुए कहा कि बंगाल के लोगों ने बाहरी ताकतों और केंद्रीय एजेंसियों के कथित दबाव को दरकिनार कर अपना स्पष्ट जनादेश बैलेट बॉक्स में दर्ज कर दिया है।
मुख्यमंत्री ने एग्जिट पोल की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि ये सर्वेक्षण जमीनी हकीकत से कोसों दूर हैं और इन्हें केवल भारतीय जनता पार्टी के निर्देशों पर तैयार किया गया है। ममता बनर्जी के अनुसार, इन आंकड़ों का उद्देश्य केवल टीएमसी कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ना और मतगणना से पहले एक भ्रम की स्थिति पैदा करना है। उन्होंने इसे एक सोची-समझी साजिश करार देते हुए जनता से इन अनुमानों पर ध्यान न देने की अपील की।
अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने ‘मां-माटी-मानुष’ के संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार, केंद्रीय बलों और स्थानीय प्रशासन के एक हिस्से के भारी दबाव के बावजूद बंगाल की जनता को झुकाया नहीं जा सका है। उन्होंने विश्वास जताया कि 4 मई को जब नतीजे आएंगे, तो यह साफ हो जाएगा कि बंगाल की संस्कृति और अस्मिता की रक्षा के लिए जनता ने भारी बहुमत से टीएमसी को चुना है।
रणनीतिक रूप से ममता बनर्जी ने इस बार मतगणना प्रक्रिया पर विशेष ध्यान देने की बात कही है। उन्होंने पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं और मतगणना एजेंटों को निर्देश दिया है कि वे ईवीएम (EVM) और मतगणना केंद्रों पर कड़ी निगरानी रखें। उन्होंने आशंका जताई कि चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की कोशिश की जा सकती है, इसलिए मतगणना के अंतिम क्षण तक मुस्तैद रहना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि जीत सुनिश्चित है, लेकिन सतर्कता में कोई कमी नहीं होनी चाहिए।
इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने अपने कार्यकर्ताओं को ‘संयम’ बरतने की भी विशेष सलाह दी है। उन्होंने कहा कि एग्जिट पोल के आंकड़ों से विचलित होने या उत्तेजित होने के बजाय शांति बनाए रखना जरूरी है। ममता ने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई केवल चुनाव जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बंगाल के सम्मान की लड़ाई है। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं की बहादुरी की प्रशंसा की, जिन्होंने “अपनी जान जोखिम में डालकर” पार्टी का झंडा बुलंद रखा।
चुनाव प्रचार के दौरान उठाए गए मुद्दों का जिक्र करते हुए उन्होंने भरोसा जताया कि उनकी सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों ने लोगों के दिलों में जगह बनाई है। उन्होंने कहा कि बंगाल के लोगों ने विभाजनकारी राजनीति के बजाय विकास और क्षेत्रीय गौरव को चुना है। 226+ सीटों का आंकड़ा देकर उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे न केवल साधारण बहुमत, बल्कि भारी जनादेश की उम्मीद कर रही हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी का यह बयान मतगणना से ठीक पहले अपनी पार्टी के कैडर को एकजुट और सक्रिय रखने की एक सोची-समझी रणनीति है। जहां एग्जिट पोल ने राज्य में सत्ता परिवर्तन या कड़ी टक्कर की संभावना जताई है, वहीं ममता के इस ‘जीत के कॉन्फिडेंस’ ने मतगणना के दिन को और भी रोमांचक बना दिया है। अब सभी की नजरें 4 मई को होने वाली गिनती पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि बंगाल की कमान फिर से ‘दीदी’ के हाथ में होगी या कोई नया राजनीतिक अध्याय शुरू होगा।

