नई दिल्ली: भारत सरकार ने नागरिकता कानूनों को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए ‘नागरिकता (संशोधन) नियम, 2026’ को अधिसूचित कर दिया है। गृह मंत्रालय द्वारा जारी इस नई अधिसूचना के बाद प्रवासी भारतीयों (PIO) और ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्डधारकों के लिए आवेदन से लेकर पासपोर्ट प्रबंधन तक के नियम बदल गए हैं। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य नागरिकता और प्रवास से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीक-आधारित बनाना है।
नए नियमों के तहत अब OCI कार्ड के लिए आवेदन की प्रक्रिया को पूरी तरह से ऑनलाइन कर दिया गया है। अब किसी भी आवेदक के लिए भौतिक रूप से फॉर्म जमा करने की अनिवार्यता समाप्त होगी, जिससे मानवीय हस्तक्षेप कम होगा और भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म होगी। सरकार ने आवेदकों की सुविधा के लिए अब ‘ई-OCI’ (डिजिटल फॉर्म) का विकल्प भी पेश किया है, जो भौतिक कार्ड के साथ-साथ मान्य होगा। इससे विदेश यात्रा के दौरान दस्तावेजों के सत्यापन में तेजी आएगी और कार्ड खोने की स्थिति में भी प्रवासी भारतीयों को असुविधा नहीं होगी।
नाबालिगों के संबंध में सरकार ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी स्पष्टता पेश की है। नए प्रावधानों के अनुसार, कोई भी नाबालिग एक साथ भारतीय और विदेशी पासपोर्ट नहीं रख सकता। सरकार ने दोहरी नागरिकता से जुड़े कानूनी विवादों को जड़ से खत्म करने के लिए यह कड़ा रुख अपनाया है। यदि किसी नाबालिग के पास विदेशी नागरिकता है, तो उसे भारतीय पासपोर्ट का मोह त्यागना होगा। इस कदम से भविष्य में नागरिकता को लेकर होने वाले कानूनी दांव-पेंचों में कमी आने की उम्मीद है।
सरकार ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि OCI स्टेटस कोई संवैधानिक अधिकार नहीं, बल्कि एक विशेष ‘विशेषाधिकार’ है। गृह मंत्रालय ने नियमों को सख्त करते हुए स्पष्ट किया है कि यदि कोई OCI धारक भारतीय कानूनों का उल्लंघन करता है या भारत की संप्रभुता के विरुद्ध कार्य करता है, तो उसका पंजीकरण तत्काल प्रभाव से रद्द किया जा सकता है। यह प्रावधान सुरक्षा एजेंसियों को उन लोगों पर नजर रखने की शक्ति देता है जो विदेशी धरती से भारत विरोधी गतिविधियों में संलिप्त पाए जा सकते हैं।
अपराधिक मामलों को लेकर भी रद्दीकरण की शर्तों को पहले के मुकाबले अधिक कठोर बना दिया गया है। यदि किसी OCI कार्डधारक को किसी न्यायालय द्वारा 2 वर्ष या उससे अधिक की सजा सुनाई जाती है, तो वह अपना OCI दर्जा खो देगा। इसके अलावा, यदि किसी व्यक्ति पर ऐसे अपराध का आरोप है जिसमें 7 साल या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है और उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, तो भी सरकार उसका पंजीकरण रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है।
हालांकि, इन सख्तियों के बीच OCI धारकों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं में कोई कटौती नहीं की गई है। उन्हें पहले की तरह ही भारत में ‘लाइफ-लॉन्ग’ मल्टीपल एंट्री वीजा, वित्तीय निवेश की स्वतंत्रता और शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश की सुविधा मिलती रहेगी। लेकिन राजनीतिक अधिकारों के मामले में स्पष्टता बरकरार है; उन्हें भारत में मतदान करने, चुनाव लड़ने या किसी भी संवैधानिक पद (जैसे जज, सांसद या मंत्री) पर नियुक्त होने का अधिकार नहीं होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन बदलावों से डेटा का केंद्रीकरण होगा और सुरक्षा मानकों में सुधार होगा। डिजिटल आवेदन प्रणाली से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि दस्तावेजों की गहन जांच भी संभव हो सकेगी। यह कदम भारत की नागरिकता प्रणाली को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। नाबालिगों के पासपोर्ट संबंधी सख्ती से पहचान की चोरी और नागरिकता के दुरुपयोग की संभावनाएं भी न्यूनतम हो जाएंगी।
उल्लेखनीय है कि OCI योजना की शुरुआत 2005 में नागरिकता अधिनियम, 1955 में संशोधन करके की गई थी। इसका उद्देश्य भारतीय मूल के लोगों को अपनी जड़ों से जुड़े रहने के लिए एक आसान सेतु प्रदान करना था। हालांकि, सुरक्षा कारणों से पाकिस्तान और बांग्लादेश से संबंध रखने वाले व्यक्तियों को इस योजना से हमेशा बाहर रखा गया है, और नए नियमों में भी इस प्रतिबंध को यथावत रखा गया है।

