नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में नक्सलवाद के मुद्दे पर सरकार का कड़ा रुख स्पष्ट करते हुए घोषणा की है कि देश में ‘लाल आतंक’ अब अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का ही परिणाम है कि छत्तीसगढ़ का बस्तर, जो कभी नक्सलवाद का सबसे अभेद्य किला माना जाता था, अब लगभग इस समस्या से मुक्त हो चुका है। शाह ने सदन को आश्वस्त किया कि सुरक्षा बलों की निरंतर कार्रवाई से नक्सली हिंसा का दायरा सिमटकर बहुत छोटे क्षेत्र तक रह गया है।
गृह मंत्री ने नक्सलवाद की मूल जड़ पर प्रहार करते हुए इसे ‘वामपंथी सोच की उपज’ करार दिया। उन्होंने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें नक्सलवाद को न्याय या विकास की लड़ाई बताया जाता है। शाह ने दो टूक शब्दों में कहा कि यह विचारधारा केवल हिंसा, अव्यवस्था और विनाश को बढ़ावा देती है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस भ्रामक नैरेटिव की वजह से हजारों आदिवासी युवाओं का जीवन बर्बाद हुआ और प्रभावित क्षेत्र दशकों तक पिछड़ेपन की मार झेलते रहे।
पूर्ववर्ती सरकारों, विशेषकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए अमित शाह ने कहा कि दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद आदिवासी क्षेत्रों तक विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं पहुँचाया गया। उन्होंने कहा कि पहले की नीति केवल कागजों तक सीमित थी, जिससे ‘रेड कॉरिडोर’ का विस्तार 12 राज्यों के लगभग 70 प्रतिशत भूभाग तक हो गया था। शाह के अनुसार, मोदी सरकार ने इस खाई को पाटने का काम किया है और आज नक्सल प्रभावित इलाकों में सड़क, स्कूल, अस्पताल और राशन जैसी बुनियादी सुविधाएं गांव-गांव तक पहुंच रही हैं।
विकास कार्यों का विवरण देते हुए गृह मंत्री ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर लोगों को आधार कार्ड, मुफ्त राशन, गैस कनेक्शन और बैंकिंग सेवाओं से जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि जब आम नागरिक को शासन की मुख्यधारा का लाभ मिलने लगता है, तो नक्सली विचारधारा की जमीन अपने आप खिसकने लगती है। बस्तर में बदली हुई तस्वीर का श्रेय उन्होंने सरकार की उन नीतियों को दिया जो ‘सुरक्षा और विकास’ के दोहरे मॉडल पर आधारित हैं।
सदन में सुरक्षा बलों के साहस की सराहना करते हुए अमित शाह ने कहा कि सीआरपीएफ (CAPF), कोबरा बटालियन और छत्तीसगढ़ पुलिस की विशेष इकाई डीआरजी (DRG) के जवानों ने अपनी जान जोखिम में डालकर शांति स्थापित की है। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि जो भी हथियार उठाएगा और सुरक्षा बलों पर गोली चलाएगा, उसे इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। शाह ने कहा कि देश में अब हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं है और सरकार हथियार डालने वालों के लिए पुनर्वास की नीति पर काम कर रही है, लेकिन हिंसा करने वालों के साथ कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।
अंत में, गृह मंत्री ने उन सभी शहीदों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की जिन्होंने नक्सलवाद के विरुद्ध इस लंबी लड़ाई में अपने प्राणों की आहुति दी। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले कुछ ही समय में भारत पूरी तरह से वामपंथी उग्रवाद से मुक्त हो जाएगा और बस्तर जैसे क्षेत्रों में विकास की एक नई सुबह होगी। उनके इस संबोधन को सदन में सत्ता पक्ष के सदस्यों ने मेज थपथपाकर सराहा, जबकि विपक्ष ने विकास के दावों पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं।

