पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 की आहट के साथ ही राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुँच गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रविवार को आसनसोल, छतना, ओंदा और खंडाघोष में ताबड़तोड़ रैलियां कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने भाजपा पर चुनाव जीतने के लिए डराने-धमकाने और राज्य के विभाजन की साजिश रचने जैसे गंभीर आरोप लगाए। ममता ने दावा किया कि भाजपा अभी से टीएमसी के उम्मीदवारों और राज्य सरकार के मंत्रियों को फोन कर धमकी दे रही है कि यदि चुनाव के बाद बहुमत कम पड़ा, तो वे पाला बदल लें।
मुख्यमंत्री ने रैलियों के दौरान एक बेहद चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि केंद्र सरकार अगले 15 दिनों के भीतर एक नया ‘डिलिमिटेशन बिल’ (परिसीमन कानून) लाने की तैयारी में है। उनका आरोप है कि इस कानून की आड़ में पश्चिम बंगाल को तीन टुकड़ों में बांटने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने जनता को आगाह किया कि राज्य के कुछ हिस्सों को काटकर बिहार और ओडिशा में मिलाने की योजना बनाई जा रही है, जिसे वे किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देंगी।
ममता बनर्जी ने भाजपा की चुनावी रणनीति पर तंज कसते हुए लोगों को एक अजीबोगरीब खतरे से भी सावधान किया। उन्होंने कहा कि मतदान के दिन भाजपा के लोग मतदाताओं को नींद की दवाई मिली चाय या मिठाई खिला सकते हैं, ताकि लोग बेहोश होकर सो जाएं और पीछे से भाजपा उनके वोट चुरा ले। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे मतदान केंद्र के आसपास किसी भी अनजान व्यक्ति से खाने-पीने की चीजें न लें और पूरी तरह सतर्क रहें।
भ्रष्टाचार और धनबल के मुद्दे पर ममता ने दावा किया कि भाजपा ने टीएमसी को सत्ता से बेदखल करने के लिए 1000 करोड़ रुपये की बड़ी डील की है। उन्होंने एक वायरल वीडियो का हवाला देते हुए कहा कि विपक्षी नेता पहले ही मोटी रकम ले चुके हैं ताकि वोटों का ध्रुवीकरण किया जा सके। मुख्यमंत्री ने इसे लोकतंत्र की हत्या करार देते हुए कहा कि भाजपा पैसे के दम पर जनादेश को खरीदना चाहती है।
वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का मुद्दा उठाते हुए ममता बनर्जी ने ‘SIR’ (वोटर लिस्ट जांच) को देश का सबसे बड़ा घोटाला करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि नागरिकता के नाम पर लोगों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। उनके अनुसार, जो लोग दशकों पहले बंगाल आए थे उन्हें नागरिकता से वंचित किया जा रहा है, जबकि हाल ही में आए कुछ लोगों को राजनीतिक लाभ के लिए नागरिकता दी जा रही है। उन्होंने इसे बंगाली पहचान पर सीधा हमला बताया।
अंत में, मुख्यमंत्री ने चुनाव प्रक्रिया की शुचिता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आशंका जताई कि भाजपा मतदान और मतगणना की गति को जानबूझकर धीमा करवा सकती है ताकि EVM मशीनों के साथ छेड़छाड़ का मौका मिल सके। उन्होंने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं और आम जनता से हर बूथ पर कड़ी नजर रखने को कहा। पश्चिम बंगाल की 294 सीटों पर होने वाले इस चुनाव में जहां भाजपा ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है, वहीं ममता बनर्जी इसे ‘बंगाल के गौरव’ की लड़ाई बनाकर मैदान में डटी हुई हैं।

