इस्लामाबाद में शनिवार को होने वाली अमेरिका और ईरान की शांति वार्ता इस समय दुनिया की सबसे बड़ी खबर बनी हुई है। 28 फरवरी से जारी भीषण युद्ध के बाद यह पहला मौका है जब दोनों देशों के शीर्ष प्रतिनिधिमंडल आमने-सामने बैठकर भविष्य की दिशा तय करेंगे। ईरान की टीम संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ के नेतृत्व में पाकिस्तान पहुँच चुकी है, जिसमें विदेश मंत्री, रक्षा परिषद के सचिव और केंद्रीय बैंक के गवर्नर जैसे महत्वपूर्ण लोग शामिल हैं।
इस वार्ता की शुरुआत से पहले ही ईरान ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि जब तक वॉशिंगटन उनकी पूर्व शर्तों को स्वीकार नहीं करता, औपचारिक बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी। ईरान का आरोप है कि अमेरिका ने पूर्व में हुए 10-पॉइंट प्रस्ताव के तीन सबसे अहम क्लॉज का उल्लंघन किया है। इसमें लेबनान और रेसिस्टेंस एक्सिस में सीजफायर का वादा निभाना, ईरान के फ्रीज किए गए फंड की रिहाई और ईरानी हवाई क्षेत्र में ड्रोन घुसपैठ को रोकना मुख्य रूप से शामिल है।
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस वार्ता को ‘अंतिम चेतावनी’ के रूप में पेश किया है। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि अगले 24 घंटे वैश्विक शांति के लिए निर्णायक होंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि इस्लामाबाद में चल रही यह कूटनीतिक कोशिश विफल होती है, तो अमेरिकी सेना दोबारा हमले शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है। ट्रंप के अनुसार, अमेरिकी युद्धपोतों को सबसे आधुनिक हथियारों से फिर से लैस किया जा रहा है ताकि किसी भी स्थिति का सामना किया जा सके।
अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस मिशन की कमान संभाल रहे हैं। जैसे ही वेंस पाकिस्तान के लिए रवाना हुए, ट्रंप ने सोशल मीडिया के माध्यम से पूरी दुनिया को संदेश दिया कि मामले का नतीजा बहुत जल्द सामने आने वाला है। अमेरिका का मुख्य ध्यान क्षेत्र में अपने हितों की रक्षा और ईरान के परमाणु कार्यक्रमों पर अंकुश लगाने पर है, जबकि ईरान अपनी संप्रभुता और आर्थिक प्रतिबंधों से मुक्ति के लिए अड़ा हुआ है।
हाल ही में ईरान के फार्स प्रांत के लार शहर में हुई ड्रोन घुसपैठ ने वार्ता की मेज पर तनाव को और बढ़ा दिया है। ईरान इस घटना को अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला मान रहा है और इसे लेकर बातचीत में कड़ा विरोध दर्ज करा सकता है। वर्तमान में दो हफ्ते का अस्थायी युद्धविराम लागू है, लेकिन अविश्वास का माहौल इतना गहरा है कि दोनों ही पक्ष एक-दूसरे की नीयत पर सवाल उठा रहे हैं।
पाकिस्तान इस समय एक उच्च-स्तरीय मेजबान की भूमिका में है, जहां सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए हैं। यह बैठक एक ऐसे चौराहे पर खड़ी है जहां से या तो एक स्थाई शांति समझौता निकल सकता है या फिर मध्य पूर्व की आग और अधिक भड़क सकती है। पूरी दुनिया की नजरें अब अगले कुछ घंटों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगी कि 2026 का यह युद्ध विराम की ओर बढ़ेगा या विनाश की ओर।

