अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार सुबह राष्ट्र के नाम एक विशेष संबोधन में ईरान के साथ जारी युद्ध पर अपनी पहली आधिकारिक रिपोर्ट पेश की। ट्रंप ने अत्यंत आक्रामक रुख अपनाते हुए दावा किया कि पिछले चार हफ्तों में अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ “तेज, निर्णायक और ऐतिहासिक” जीत हासिल की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान की सैन्य क्षमता अब लगभग शून्य हो चुकी है, उनकी नौसेना खत्म हो गई है और वायुसेना खंडहर में तब्दील हो चुकी है। ट्रंप के अनुसार, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का कमांड नेटवर्क पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया है।
संबोधन के दौरान ट्रंप ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग, होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका को अब अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस मार्ग पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है। ट्रंप ने उन देशों को आड़े हाथों लिया जो इस रास्ते से तेल प्राप्त करते हैं, यह कहते हुए कि अब उन देशों को ही अपनी तेल सुरक्षा की जिम्मेदारी उठानी होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के लिए इस मार्ग को तुरंत नहीं खोला, तो अमेरिका सीधे ईरान के परमाणु संयंत्रों को निशाना बनाने से पीछे नहीं हटेगा।
ईरान की आंतरिक स्थिति पर बात करते हुए ट्रंप ने गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि ईरानी प्रशासन ने हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान लगभग 45,000 प्रदर्शनकारियों की हत्या कर दी है। हालांकि इस आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ट्रंप ने इसे ईरान की मौजूदा सत्ता की क्रूरता का प्रमाण बताया। साथ ही, उन्होंने एक चौंकाने वाला दावा भी किया कि ईरान में सत्ता परिवर्तन हो चुका है और वर्तमान में वहां जो नई लीडरशिप है, वह पिछली लीडरशिप की तुलना में कम कट्टरपंथी है।
आगामी रणनीति पर चर्चा करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि भले ही पर्दे के पीछे कूटनीतिक बातचीत चल रही हो, लेकिन सैन्य कार्रवाई थमेगी नहीं। उन्होंने ऐलान किया कि अगले 2 से 3 हफ्तों के भीतर अमेरिका ईरान पर और भी जोरदार और घातक हमले करेगा। ट्रंप ने संकेत दिया कि ईरान का तेल इंफ्रास्ट्रक्चर उनके अगले निशाने पर हो सकता है। उन्होंने साफ लहजे में चेतावनी दी कि अगर ईरान समझौते के लिए तैयार नहीं होता, तो अमेरिका की सैन्य शक्ति उसे ‘पाषाण काल’ (Stone Age) में वापस धकेल देगी।
अंत में, ट्रंप ने अपनी नीतियों को इजरायल और मिडिल ईस्ट के अस्तित्व के लिए अनिवार्य बताया। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के समय हुए 2015 के परमाणु समझौते की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि अगर वह समझौता आज प्रभावी होता, तो ईरान अब तक परमाणु हथियारों का जखीरा बना चुका होता। ट्रंप के अनुसार, उनकी सख्त कार्रवाई ने ही इजरायल को विनाश से बचाया है। उन्होंने संकल्प दोहराया कि वे किसी भी स्थिति में ईरान को परमाणु संपन्न राष्ट्र नहीं बनने देंगे और इसके लिए वे हर संभव सैन्य शक्ति का उपयोग करने को तैयार हैं।

