वाशिंगटन/तेहरान: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। ईरान द्वारा ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को ब्लॉक किए जाने के बाद दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हो गई है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में हड़कंप मच गया है। इस संकट के बीच अमेरिका के युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि वह शांति समझौता नहीं करता है, तो अमेरिका अपने हमलों को और अधिक आक्रामक बना देगा।
हेगसेथ ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस युद्ध को समाप्त करने के लिए एक ठोस डील चाहते हैं, लेकिन यह पूरी तरह से अमेरिका की शर्तों पर होगी। उन्होंने ईरान की नई सरकार, जिसका नेतृत्व मोजतबा खामेनेई कर रहे हैं, को पिछली सरकार के मुकाबले ‘समझदार’ करार देते हुए सलाह दी कि वे बातचीत का रास्ता चुनें। अमेरिका का मानना है कि पिछले एक महीने से चल रही सैन्य कार्रवाई ने ईरान की सैन्य शक्ति और मनोबल को काफी हद तक तोड़ दिया है, जिससे अब ईरान के पास विकल्प सीमित रह गए हैं।
युद्ध मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेषकर नाटो (NATO) देशों पर भी तीखा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब समुद्री रास्तों की सुरक्षा के लिए अमेरिका ने मदद मांगी थी, तब इन देशों ने साथ नहीं दिया। हेगसेथ ने साफ शब्दों में कहा कि होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग की सुरक्षा की जिम्मेदारी अकेले अमेरिका की नहीं है। उन्होंने अन्य देशों को चुनौती देते हुए कहा कि जो देश तेल संकट का रोना रो रहे हैं, उन्हें या तो अमेरिका से तेल खरीदना चाहिए या फिर खुद हिम्मत दिखाकर होर्मुज से अपनी तेल सप्लाई सुरक्षित करनी चाहिए।
सैन्य मोर्चे पर बात करते हुए हेगसेथ ने बताया कि वे हाल ही में मिडिल ईस्ट में तैनात अमेरिकी सैनिकों से मिलकर लौटे हैं और वहां की स्थिति निर्णायक दौर में है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी हवाई हमलों ने ईरान की जवाबी कार्रवाई की क्षमता को कमजोर कर दिया है। ट्रंप प्रशासन का रुख अब ‘आर-पार’ का नजर आ रहा है, जहाँ वे कूटनीति के साथ-साथ भारी सैन्य दबाव का इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि ईरान को झुकने पर मजबूर किया जा सके।
इससे पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने भी कड़े लहजे में कहा था कि अगर ईरान समझौते के लिए राजी नहीं होता है, तो उसके तेल कुओं और प्रमुख रणनीतिक ठिकानों को चुन-चुनकर निशाना बनाया जाएगा। ट्रंप की इस ‘मैक्सिमम प्रेशर’ रणनीति का उद्देश्य ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले तेल क्षेत्र को पूरी तरह ध्वस्त करना है। इस धमकी ने वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों को लेकर अनिश्चितता और बढ़ा दी है, जिससे आने वाले दिनों में महंगाई और बढ़ने की आशंका है।
आगामी कुछ दिन इस युद्ध का भविष्य तय करेंगे। एक तरफ अमेरिका अपनी शर्तों पर जंग खत्म करने की जिद पर अड़ा है, तो दूसरी तरफ ईरान के सामने अपनी सत्ता और सैन्य साख बचाने की चुनौती है। यदि बातचीत का कोई रास्ता नहीं निकलता है, तो यह संघर्ष न केवल पश्चिम एशिया बल्कि पूरी दुनिया को एक बड़े आर्थिक और मानवीय संकट में धकेल सकता है। वैश्विक नेता अब टकटकी लगाए बैठे हैं कि क्या मोजतबा खामेनेई की अगुवाई वाली सरकार ट्रंप की शर्तों को मानती है या फिर युद्ध की आग और भड़कती है।

