वाशिंगटन/बुडापेस्ट: अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के साथ जारी तनाव और वैश्विक संघर्षों पर ट्रंप प्रशासन के कड़े और स्पष्ट रुख को दोहराया है। हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में एक महत्वपूर्ण संबोधन के दौरान वेंस ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ईरानी नेतृत्व ने साफ नीयत के साथ बातचीत में हिस्सा नहीं लिया, तो उन्हें इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाला अमेरिका कूटनीति को प्राथमिकता दे रहा है, लेकिन इसे कमजोरी समझने की भूल भारी पड़ सकती है।
वेंस ने जानकारी दी कि वर्तमान में ईरान और अमेरिका के बीच एक अस्थाई सीजफायर लागू है। इस समझौते के तहत अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान पर सैन्य हमले रोकने के लिए सहमत हुए हैं, जिसके बदले में ईरान ने वैश्विक व्यापार के लिए सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने पर सहमति जताई है। हालांकि, उपराष्ट्रपति ने आगाह किया कि यह समझौता तभी टिकाऊ रहेगा जब ईरान ईमानदारी से अपनी प्रतिबद्धताओं को निभाएगा।
उपराष्ट्रपति ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने स्वयं अमेरिकी वार्ता दल को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे ईरान के साथ किसी ठोस और स्थायी समझौते तक पहुंचने के लिए पूरी निष्ठा के साथ काम करें। वेंस के अनुसार, ट्रंप प्रशासन सैन्य साधनों के इस्तेमाल के बजाय बातचीत की मेज पर समाधान चाहता है। लेकिन उन्होंने सख्त लहजे में यह भी जोड़ा, “अगर ईरान ने ईमानदारी नहीं दिखाई, तो उन्हें पता चल जाएगा कि अमेरिका का राष्ट्रपति मजाक करने वालों में से नहीं है।”
यह बयान ऐसे समय में आया है जब खाड़ी देशों में सीजफायर के बावजूद सुरक्षा संकट गहरा गया है। एक तरफ बुडापेस्ट में कूटनीतिक चर्चाएं चल रही हैं, वहीं दूसरी ओर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया है कि उसका एयर डिफेंस सिस्टम वर्तमान में गंभीर मिसाइल खतरों का सामना कर रहा है। इसके साथ ही कुवैत ने भी अपने क्षेत्र में ताजा हमलों की बात कही है, जिसने इस शांति समझौते की स्थिरता पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
अंत में, जेडी वेंस ने विश्वास जताया कि यदि ईरान झूठ और धोखे का रास्ता छोड़कर ईमानदारी से काम करने को तैयार है, तो एक स्थायी शांति समझौते तक पहुँचा जा सकता है। उन्होंने साफ कर दिया कि अमेरिका शांति का पक्षधर है, लेकिन अपने सहयोगियों और वैश्विक हितों की सुरक्षा के लिए किसी भी सख्त कदम से पीछे नहीं हटेगा। फिलहाल क्षेत्र में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और किसी भी वक्त स्थिति बिगड़ने की आशंका बनी हुई है।

