दिल्ली सरकार ने राजधानी को प्रदूषण मुक्त और हरा-भरा बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए ‘ग्रीन एक्शन प्लान (GAP) 2026-27’ का आधिकारिक शंखनाद कर दिया है। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बुधवार, 1 अप्रैल को इस महत्वाकांक्षी अभियान की घोषणा करते हुए बताया कि इस वर्ष 22 सरकारी विभाग मिलकर दिल्ली के कोने-कोने में 70.05 लाख से अधिक पेड़, झाड़ियां और बांस की हेज लगाएंगे। यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान से प्रेरित है, जिसका उद्देश्य दिल्ली के हरित आवरण (Green Cover) को अभूतपूर्व ऊंचाइयों पर ले जाना है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में तैयार की गई इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका व्यापक समन्वय है। इस बार सरकार ने केवल लक्ष्य निर्धारित नहीं किए हैं, बल्कि उनकी वास्तविक समय पर निगरानी के लिए ‘जीएपी पोर्टल’ भी लॉन्च किया है। ‘फॉरेस्ट एंड वाइल्डलाइफ विभाग’ को इस पूरे अभियान का नोडल विभाग बनाया गया है, जो सभी 22 विभागों के कार्यों की प्रगति को ट्रैक करेगा। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि पर्यावरण संरक्षण के लिए सभी विभागों को एक मंच पर आकर जिम्मेदारी निभानी होगी।
पौधारोपण के लक्ष्यों का वितरण बहुत ही रणनीतिक तरीके से किया गया है। सबसे बड़ी जिम्मेदारी फॉरेस्ट विभाग को दी गई है, जिसे 27 लाख से अधिक पौधे लगाने हैं। इसके बाद दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को 10 लाख, एनडीएमसी (NDMC) को 5.05 लाख और एमसीडी (MCD) को 5 लाख पौधों का लक्ष्य दिया गया है। शिक्षा के क्षेत्र को भी इसमें सक्रिय रूप से जोड़ा गया है, जहां स्कूल शिक्षा विभाग 3.5 लाख और उच्च व तकनीकी शिक्षा विभाग मिलकर हजारों पौधे लगाएंगे। इसके अलावा पीडब्ल्यूडी, एनएचएआई और एनटीपीसी जैसे बुनियादी ढांचा विभागों को भी विशिष्ट लक्ष्य सौंपे गए हैं।
इस अभियान को मात्र एक सरकारी कार्यक्रम न रखकर जन-आंदोलन बनाने के लिए सरकार ने नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित की है। योजना के तहत फॉरेस्ट विभाग, डीपीजीएस और डीएमआरसी के माध्यम से दिल्ली की जनता को 12 लाख से अधिक पौधे मुफ्त वितरित किए जाएंगे। इस पहल का उद्देश्य दिल्ली के प्रत्येक नागरिक को हरित क्रांति का हिस्सा बनाना है, ताकि घरों और निजी परिसरों में भी हरियाली का विस्तार हो सके और लोग पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझें।
तकनीकी दृष्टि से इस बार सरकार ने ‘मल्टी-लेयर प्लांटेशन’ की रणनीति अपनाई है। पर्यावरण मंत्री ने स्पष्ट किया कि केवल बड़े पेड़ लगाने से संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र संतुलित नहीं होता, इसलिए इस योजना में झाड़ियां और ग्राउंड कवर पौधों को भी समान महत्व दिया गया है। यह बहु-स्तरीय पौधारोपण न केवल धूल के कणों को रोकने में अधिक प्रभावी होगा, बल्कि दिल्ली की जैव विविधता को भी मजबूती प्रदान करेगा, जिससे स्थानीय पशु-पक्षियों के लिए बेहतर आवास तैयार हो सके।
अंत में, सरकार का सबसे अधिक जोर पौधों के अस्तित्व पर है। मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कड़े निर्देश दिए हैं कि सभी विभाग केवल आंकड़े पूरे करने के लिए पौधे न लगाएं, बल्कि उनकी उचित देखभाल और सिंचाई सुनिश्चित करें। जीएपी पोर्टल पर नियमित अपडेट के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि लगाए गए पौधे जीवित रहें और बड़े होकर दिल्ली की हवा को शुद्ध करने में अपना योगदान दें। सरकार की यह दूरदर्शी योजना भविष्य में दिल्ली को प्रदूषण के कलंक से मुक्ति दिलाने में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

