रायपुर/नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के दैनिक यात्रियों और कैब ड्राइवरों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल की पहल पर केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ में ‘भारत टैक्सी’ ऐप लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। लोकसभा सत्र के दौरान केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने इस विजन को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह ऐप ओला, उबर और रैपिडो जैसे निजी एग्रीगेटर्स के दबदबे को खत्म कर एक पारदर्शी और सहकारी विकल्प पेश करेगा।
ड्राइवर नहीं, अब ‘हितधारक’ बनेंगे सारथी केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने जोर देकर कहा कि इस मॉडल में ड्राइवर केवल ‘गिग-वर्कर्स’ नहीं, बल्कि भारत के सबसे बड़े सहकारी आंदोलनों में से एक के हितधारक (Stakeholders) होंगे। शाह के अनुसार, मोदी सरकार सहकारी आंदोलन को कॉर्पोरेट क्षेत्र के समान मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। आंकड़ों की बात करें तो 1 मार्च 2026 तक, भारत टैक्सी ने 21.34 लाख पंजीकृत उपयोगकर्ताओं और 2.31 लाख पंजीकृत ‘सारथी’ (ड्राइवरों) का विशाल आधार तैयार कर लिया है।
सर्ज प्राइसिंग और भारी कमीशन से मिलेगी मुक्ति सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने सदन में यात्रियों और ड्राइवरों की पीड़ा को साझा करते हुए कहा कि जनता ‘सर्ज प्राइसिंग’ (अचानक बढ़ती कीमतों) से त्रस्त है, वहीं ड्राइवर भारी कॉर्पोरेट कमीशन (जो अक्सर कमाई का 25% से 30% होता है) के कारण परेशान हैं। उन्होंने कहा, “भारत टैक्सी का सहकारी मॉडल इस संकट का सटीक समाधान है और मैं माननीय अमित शाह जी से अनुरोध कर छत्तीसगढ़ में इसकी शुरुआत में तेजी लाऊंगा।” विशेष रूप से हवाई अड्डों पर फ्लाइट उतरते ही आसमान छूने वाले किराए से भी यात्रियों को अब निजात मिलेगी।
टियर-2 और टियर-3 शहरों पर विशेष ध्यान वर्तमान में यह सेवा देश के 8 प्रमुख शहरों में सफलतापूर्वक संचालित हो रही है। केंद्र सरकार का लक्ष्य अगले तीन वर्षों में इसका विस्तार छत्तीसगढ़ के प्रमुख केंद्रों सहित देश के टियर-2 और टियर-3 शहरों में करने का है। यह ऐप ONDC जैसे ओपन नेटवर्क का उपयोग करता है, जिससे यह निजी कंपनियों के मुकाबले अधिक सुरक्षित और सस्ता साबित होगा।
डिजिटल सहकारी क्रांति की ओर कदम भारत टैक्सी को शहरी आवागमन (Urban Mobility) में एक बड़ी क्रांति के रूप में देखा जा रहा है। ड्राइवरों को सशक्त बनाकर और यात्रियों को दैनिक मूल्य शोषण से बचाकर, यह ऐप भारत के डिजिटल सहकारी परिदृश्य को फिर से परिभाषित करने के लिए तैयार है। छत्तीसगढ़ में इसकी शुरुआत होने से न केवल आवागमन सुगम होगा, बल्कि स्थानीय युवाओं और ड्राइवरों के लिए स्वरोजगार के बेहतर और सम्मानजनक अवसर भी पैदा होंगे।

