भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) ने हाल ही में देश के चुनावी प्रबंधन से जुड़ा एक बड़ा और अहम फैसला लेते हुए दिल्ली, हरियाणा समेत छह राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान की समयसीमा बढ़ा दी है। चुनाव आयोग का यह कदम प्रशासनिक सहूलियत, जमीनी स्तर पर आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों और विभिन्न राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) द्वारा किए गए विशेष अनुरोधों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
इस विस्तारित समयसीमा के तहत, उन सभी नागरिकों को बड़ी राहत मिली है जो अपने नाम मतदाता सूची में जुड़वाने, किसी प्रकार के सुधार करवाने या नाम हटवाने के लिए दावे और आपत्तियां प्रस्तुत नहीं कर पाए थे। आयोग ने सभी संबंधित राज्यों को निर्देश दिए हैं कि वे इस बढ़ी हुई अवधि का व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार करें, ताकि अधिक से अधिक पात्र मतदाता इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकें।
इस फेरबदल से सबसे महत्वपूर्ण राहत दिल्ली के मतदाताओं को मिली है, जहां प्रशासनिक और चुनावी तैयारियों को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने के लिए SIR की समयसीमा में महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं। दिल्ली के संशोधित कार्यक्रम के अनुसार, अब दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तिथि 25 नवंबर तक (पहले यह 30 अक्टूबर थी) कर दी गई है। इसके अलावा, इन सभी दावों और आपत्तियों का निपटारा 15 दिसंबर तक पूरा किया जाएगा, और अंत में अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 22 दिसंबर को किया जाएगा।
महाराष्ट्र, हरियाणा, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों में भी SIR की पूरी प्रक्रिया का शेड्यूल संशोधित किया गया है। महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तिथि अब 13 नवंबर (पूर्व में 26 अक्टूबर) कर दी गई है, और यहाँ अंतिम सूची 30 नवंबर को प्रकाशित होगी। वहीं, हरियाणा और आंध्र प्रदेश में नोटिस तथा दावों व आपत्तियों के निपटारे की अवधि को बढ़ाकर 20 नवंबर तक कर दिया गया है।
पूर्वोत्तर राज्य नगालैंड में भी इस विशेष अभियान की गति को बनाए रखते हुए दावों और आपत्तियों को दर्ज कराने की अवधि 25 नवंबर तक बढ़ाई गई है, जबकि तेलंगाना में पूरी प्रक्रिया के विभिन्न चरणों की समयसीमा को 26 नवंबर तक विस्तारित किया गया है। इन दोनों ही राज्यों (नगालैंड और तेलंगाना) में भी अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 30 नवंबर को किया जाएगा।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस पूरी संशोधित समयसारणी के दौरान पारदर्शिता और निष्पक्षता का विशेष ध्यान रखा जाए। आयोग ने सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए हैं कि वे इस बदलाव की आधिकारिक सूचना सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को लिखित रूप में दें, ताकि चुनावी प्रक्रिया में पूर्ण सहभागिता और समन्वय बना रहे।

