केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लेते हुए नीति आयोग के संगठनात्मक ढांचे को और मजबूत किया है। भारत के राजपत्र (Gazette of India) में जारी एक आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम और डॉ. जोरम अनिया को आयोग के पूर्णकालिक सदस्यों के रूप में नियुक्त करने की स्वीकृति दे दी है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब सरकार ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को लेकर रणनीतिक योजनाएं तैयार कर रही है।
इन दोनों विशेषज्ञों की नियुक्ति उनके कार्यभार संभालने की तिथि से प्रभावी होगी और अगले आदेश तक जारी रहेगी। कैबिनेट सचिवालय द्वारा जारी नोटिफिकेशन में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि नए सदस्यों पर वही सेवा शर्तें और नियम लागू होंगे, जो वर्तमान में नीति आयोग के अन्य पूर्णकालिक सदस्यों पर लागू हैं। इसका अर्थ है कि उन्हें आयोग की निर्णय लेने वाली कोर टीम में समान दर्जा और जिम्मेदारियां प्राप्त होंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन नियुक्तियों से नीति निर्माण में एक नई ऊर्जा और दृष्टिकोण देखने को मिलेगा। डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम, जिनका अनुभव क्षमता निर्माण और सार्वजनिक नीति में काफी गहरा है, प्रशासनिक सुधारों को नई दिशा दे सकते हैं। वहीं, डॉ. जोरम अनिया की उपस्थिति पूर्वोत्तर राज्यों की विशिष्ट चुनौतियों और वहां की विकास संभावनाओं को राष्ट्रीय मुख्यधारा की नीतियों में प्राथमिकता दिलाने में सहायक सिद्ध होगी।


इस विस्तार का मुख्य उद्देश्य आयोग के बौद्धिक आधार को और अधिक व्यापक बनाना है। चूँकि नीति आयोग भारत सरकार के ‘थिंक टैंक’ के रूप में कार्य करता है, इसलिए विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों का शामिल होना साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण (Evidence-based policy making) के लिए अनिवार्य है। यह निर्णय न केवल प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भविष्य की चुनौतियों जैसे तकनीकी बदलाव और आर्थिक सुधारों के प्रति सरकार की गंभीरता को भी दर्शाता है।
अंततः, यह रणनीतिक बदलाव नीति आयोग की कार्यप्रणाली को अधिक गतिशील बनाने की उम्मीद जगाता है। नए सदस्यों के आने से विभिन्न मंत्रालयों और राज्य सरकारों के बीच समन्वय और बेहतर होगा। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि ये नवनियुक्त सदस्य स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कौन से अभिनव बदलाव लेकर आते हैं, जिससे देश की विकास दर को और गति मिल सके।

