पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, आज दक्षिण 24 परगना जिले की दो प्रमुख विधानसभा सीटों के 15 मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान (Repolling) की प्रक्रिया शुरू हो गई है। निर्वाचन आयोग ने यह फैसला पिछले चरणों के दौरान मिली गंभीर शिकायतों और ईवीएम में छेड़छाड़ के आरोपों की गहन जांच के बाद लिया है। आज सुबह 7 बजे से ही डायमंड हार्बर और मगराहाट पश्चिम विधानसभा क्षेत्रों के चिन्हित बूथों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदाताओं की लंबी कतारें देखी जा रही हैं।
पुनर्मतदान का यह निर्णय मुख्य रूप से 29 अप्रैल को हुए मतदान के दौरान सामने आई विसंगतियों के कारण लिया गया। उस समय यह चौंकाने वाली बात सामने आई थी कि कई मतदान केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के चुनाव चिह्न के सामने टेप लगा दिया गया था, जिससे मतदाता अपनी पसंद का बटन नहीं दबा पा रहे थे। इसके अलावा, चुनाव आयोग को ऐसी शिकायतें भी मिली थीं कि कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा ईवीएम के इस्तेमाल की अवैध रिकॉर्डिंग की गई और कई स्थानों पर सुरक्षा कैमरों को जानबूझकर बंद कर दिया गया था।
विस्तृत विवरण के अनुसार, मगराहाट पश्चिम विधानसभा सीट के कुल 11 बूथों पर दोबारा वोट डाले जा रहे हैं। इनमें उत्तर ईयरपुर, नाजरा एफ.पी. स्कूल, देउला, और बहिरपुया कुरकुरिया जैसे क्षेत्रों के मतदान केंद्र शामिल हैं। वहीं, हाई-प्रोफाइल मानी जाने वाली डायमंड हार्बर सीट के 4 बूथों—बगदा जूनियर हाई स्कूल, चंद्रा, हरिदेवपुर और रॉयनगर—में भी पुनर्मतदान की प्रक्रिया चल रही है। आयोग ने सुनिश्चित किया है कि इन सभी केंद्रों पर पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अतिरिक्त केंद्रीय बलों की तैनाती की जाए।
इस पूरे विवाद पर राजनीतिक पारा भी चढ़ा हुआ है। पश्चिम बंगाल बीजेपी के सह-प्रभारी अमित मालवीय ने चुनाव के दौरान आरोप लगाया था कि सत्ता पक्ष के प्रभाव में मतदाताओं को डराया-धमकाया गया और उन्हें पार्टी का विकल्प चुनने से रोका गया। मालवीय के अनुसार, कई बूथों पर चुनाव प्रक्रिया को बाधित करने के लिए सुनियोजित तरीके से कैमरों को बंद किया गया था, जिसकी जानकारी स्थानीय निर्वाचन अधिकारियों ने समय रहते मुख्य आयोग को नहीं दी थी।
निर्वाचन आयोग ने आज के मतदान को सुचारू बनाने के लिए विशेष प्रयास किए हैं। आयोग ने स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिए थे कि पुनर्मतदान की सूचना हर एक मतदाता तक पहुँचाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। अधिकारियों ने गांव-गांव जाकर मुनादी करवाई और मतदाताओं को आश्वस्त किया कि वे बिना किसी डर के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकते हैं। आज सुबह से ही केंद्रों पर शांतिपूर्ण माहौल बना हुआ है और अब तक किसी भी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली है।
तकनीकी विसंगतियों को लेकर आयोग बेहद सतर्क है। जांच के दौरान यह बात भी संज्ञान में आई थी कि सीसीटीवी कैमरों के अचानक बंद होने की रिपोर्ट निचले स्तर के अधिकारियों ने समय पर नहीं दी थी, जिसे आयोग ने ‘गंभीर चूक’ माना है। इसी के चलते आज होने वाली वोटिंग की सीधी वेबकास्टिंग की जा रही है ताकि मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके। सुबह से ही महिला और बुजुर्ग मतदाताओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है, जो लोकतंत्र के इस महापर्व में अपनी दोबारा भागीदारी सुनिश्चित कर रहे हैं।
सुरक्षा के दृष्टिकोण से, इन 15 बूथों को ‘अति-संवेदनशील’ श्रेणी में रखा गया है। प्रत्येक मतदान केंद्र के बाहर और भीतर भारी संख्या में पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों के जवान तैनात हैं। मतदाताओं की पहचान की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि फर्जी मतदान की कोई गुंजाइश न रहे। मतदान शाम 6 बजे तक जारी रहेगा और आयोग ने स्पष्ट किया है कि वोटिंग खत्म होने के बाद इन ईवीएम को कड़ी सुरक्षा के बीच स्ट्रांग रूम तक पहुँचाया जाएगा।
निष्कर्षतः, यह पुनर्मतदान पश्चिम बंगाल के चुनावी निष्पक्षता की साख को बचाने के लिए आयोग द्वारा उठाया गया एक बड़ा कदम है। हालांकि राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं, लेकिन अंतिम फैसला जनता के हाथ में है जो आज दोबारा लाइनों में लगकर अपने प्रतिनिधि का चुनाव कर रही है। शाम तक आने वाले मतदान प्रतिशत के आंकड़े यह तय करेंगे कि दोबारा हुई इस प्रक्रिया में जनता की भागीदारी कितनी प्रभावी रही है।

