असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए सियासी बिसात बिछ चुकी है, और कांग्रेस ने अपनी तीसरी सूची जारी कर चुनावी समर को और भी दिलचस्प बना दिया है। इस सूची में पार्टी ने 22 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया है, जिसमें अनुभवी नेताओं और नए चेहरों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की गई है। राजनीतिक गलियारों में इस लिस्ट को कांग्रेस के ‘सोशल इंजीनियरिंग’ दांव के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि पार्टी ने विभिन्न समुदायों और क्षेत्रों की पकड़ को ध्यान में रखते हुए अपने मोहरे उतारे हैं।
पार्टी के भीतर इस चयन को लेकर काफी मंथन हुआ है, जिसका मुख्य आधार ‘विनेबिलिटी’ (जीतने की क्षमता) रहा है। इस लिस्ट में कुछ वर्तमान विधायकों को फिर से मौका मिला है, तो वहीं कुछ सीटों पर स्थानीय नाराजगी को भांपते हुए चेहरे बदले गए हैं। कांग्रेस के इस आक्रामक रुख से कार्यकर्ताओं में नई जान फूंकने की कोशिश की गई है, जिससे यह स्पष्ट है कि पार्टी सत्ता विरोधी लहर का फायदा उठाने और अपने पुराने गढ़ों को बचाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

तीसरी सूची आने के बाद अब राज्य की सभी 126 सीटों पर चुनावी मुकाबला लगभग साफ होता जा रहा है। सत्ताधारी भाजपा और उसके सहयोगियों (AGP और UPPL) ने भी अपनी घेराबंदी तेज कर दी है, जिससे असम में इस बार बहुकोणीय और कड़ा मुकाबला होने की संभावना है। स्थानीय जानकारों का मानना है कि उम्मीदवारों की यह घोषणा न केवल कांग्रेस की आंतरिक मजबूती को दर्शाती है, बल्कि विपक्षी गठबंधन ‘असम सम्मिलित मोर्चा’ के बीच सीटों के तालमेल को भी अंतिम रूप देती दिख रही है।
चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, राज्य में 9 अप्रैल 2026 को मतदान होना है और नतीजों का ऐलान 4 मई को किया जाएगा। आने वाले हफ्तों में बड़े नेताओं की रैलियों और प्रचार अभियानों के साथ ही चुनावी घमासान और तेज होने की उम्मीद है।

