मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बातचीत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है। मंगलवार, 14 अप्रैल 2026 को दोनों शीर्ष नेताओं के बीच करीब 40 मिनट तक फोन पर चर्चा हुई। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच सीजफायर के बावजूद तनाव चरम पर है और राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से लगातार मिल रही धमकियों ने युद्ध की आशंकाओं को फिर से जीवित कर दिया है।
पीएम मोदी ने इस संवाद की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर साझा करते हुए बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने उन्हें विशेष रूप से पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर चर्चा करने के लिए कॉल किया था। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति ट्रंप को अपना ‘मित्र’ बताते हुए कहा कि दोनों देशों ने अपनी व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई है। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति की भी समीक्षा की गई।
इस बातचीत का एक सबसे महत्वपूर्ण बिंदु स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (होर्मुज जलडमरूमध्य) की सुरक्षा रहा। खाड़ी क्षेत्र में तनाव के कारण इस वैश्विक व्यापारिक मार्ग के बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और स्थिरता के लिए इस मार्ग को खुला और सुरक्षित रखना अनिवार्य है। ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव के मद्देनजर भारत और अमेरिका का इस मुद्दे पर एक साथ आना काफी अहम माना जा रहा है।

भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने इस बातचीत के बारे में अतिरिक्त जानकारी देते हुए बताया कि चर्चा का मुख्य फोकस होर्मुज की नाकाबंदी रोकने पर था। राजदूत ने यह भी संकेत दिया कि आने वाले हफ्तों में भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा सुरक्षा सहित कई बड़े और महत्वपूर्ण समझौतों पर मुहर लग सकती है। यह संकेत देता है कि अमेरिका भारत को न केवल एक सुरक्षा भागीदार, बल्कि एक प्रमुख आर्थिक और ऊर्जा सहयोगी के रूप में भी देख रहा है।
बातचीत के दौरान एक भावुक क्षण भी आया, जब राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी के प्रति अपना व्यक्तिगत सम्मान व्यक्त किया। सर्जियो गोर के अनुसार, ट्रंप ने मोदी से कहा, “मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि हम सब आपसे प्यार करते हैं।” यह बयान दोनों नेताओं के बीच के व्यक्तिगत तालमेल और भारत-अमेरिका संबंधों की गहराई को दर्शाता है। व्हाइट हाउस और भारत सरकार दोनों ने ही इस वार्ता को बेहद सकारात्मक और फलदायी बताया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सीजफायर और इस्लामाबाद में हुई हालिया वार्ताओं के बाद मोदी-ट्रंप की यह चर्चा वैश्विक शांति के लिए महत्वपूर्ण है। एक तरफ जहां ट्रंप ईरान को लेकर कड़ा रुख अपनाए हुए हैं, वहीं भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता और कूटनीति के जरिए तनाव कम करने की कोशिश कर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इन दोनों देशों का सहयोग मिडिल ईस्ट के अशांत माहौल को शांत करने में कितनी भूमिका निभाता है।

