दिल्ली की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल और तकनीकी अपग्रेडेशन का निर्णय लिया है। सरकार ने घोषणा की है कि अब राजधानी में पुराने राशन कार्डों के स्थान पर आधुनिक स्मार्ट राशन कार्ड जारी किए जाएंगे। ये कार्ड क्यूआर (QR) कोड और डिजिटल फीचर्स से लैस होंगे, जिससे न केवल लाभार्थियों की पहचान करना आसान होगा, बल्कि राशन की कालाबाजारी और फर्जीवाड़े पर भी पूरी तरह से लगाम लग सकेगी।
प्रशासनिक स्तर पर जनता की समस्याओं को सुलझाने के लिए मुख्यमंत्री ने ‘जन शिकायत समाधान कैंप’ शुरू करने का निर्देश दिया है। ये कैंप 1 मई से हर शनिवार सुबह 9 बजे से 11 बजे तक सभी संबंधित केंद्रों पर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों की खास बात यह होगी कि वहां असिस्टेंट कमिश्नर रैंक के अधिकारियों की मौजूदगी अनिवार्य होगी, ताकि राशन कार्ड से जुड़े लंबित मामलों और तकनीकी त्रुटियों का मौके पर ही समाधान निकाला जा सके।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि वह खुद इन समाधान कैंपों का औचक निरीक्षण करेंगी। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि आम जनता को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। सरकार का मुख्य उद्देश्य राशन कार्ड में नाम जुड़वाने, सुधार करने या नए कार्ड बनवाने जैसी प्रक्रियाओं को सरल और बाधा मुक्त बनाना है। मुख्यमंत्री ने राशन वितरण में होने वाली अनियमितताओं, जैसे कम वजन देना या सामान की कटौती पर सख्त नाराजगी जाहिर की है।
पारदर्शिता को एक कदम और आगे ले जाते हुए, सरकार ने नए लाभार्थियों के चयन के लिए एक विशेष समिति बनाने का प्रस्ताव दिया है। यह समिति जमीनी स्तर पर पात्रता की जांच करेगी ताकि योजना का लाभ केवल उन्हीं लोगों को मिले जो वास्तव में इसके हकदार हैं। मुख्यमंत्री ने साफ लहजे में कहा है कि पूरी सप्लाई चेन में डीलरों और सप्लायरों की जिम्मेदारी तय की जाएगी और किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार पाए जाने पर दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई होगी।
डिजिटल इंडिया और ‘वन नेशन, वन राशन कार्ड’ योजना को बढ़ावा देने के लिए इन कैंपों का उपयोग जागरूकता फैलाने के लिए भी किया जाएगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे जनता को बताएं कि एक व्यक्ति केवल एक ही स्थान से राशन प्राप्त कर सकता है। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने विभाग को आदेश दिया है कि जल्द से जल्द नए राशन कार्ड के लिए आवेदन आमंत्रित किए जाएं, ताकि छूटे हुए पात्र परिवारों को जल्द से जल्द सरकारी सुरक्षा जाल में शामिल किया जा सके।
उज्ज्वला योजना और मुफ्त एलपीजी योजना की समीक्षा करते हुए बैठक में बताया गया कि दिल्ली के करीब 12.39 लाख परिवार इसका लाभ उठा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने लक्ष्य निर्धारित किया है कि आगामी दीपावली तक सभी 15.47 लाख पात्र परिवारों को इस योजना से जोड़ दिया जाए। इसके लिए तेल कंपनियों के साथ मिलकर डेटा साझा किया जाएगा और पंजीकरण अभियान में तेजी लाई जाएगी ताकि कोई भी गरीब परिवार बिना गैस कनेक्शन के न रहे।
योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली तकनीकी बाधाओं को दूर करने के लिए जिला कार्यालयों में आधार केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों का मुख्य कार्य लाभार्थियों का 100 प्रतिशत ई-केवाईसी (e-KYC) पूरा करना होगा। बायोमेट्रिक और आधार सत्यापन के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे असली लाभार्थी तक ही पहुंचे और बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह समाप्त हो जाए।
अंत में, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का यह कदम दिल्ली की राशन व्यवस्था को पूरी तरह से डिजिटल और जन-केंद्रित बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल माना जा रहा है। राशन वितरण से लेकर एलपीजी कनेक्शन तक, सरकार तकनीक के उपयोग से भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने और वितरण प्रणाली में जवाबदेही तय करने की कोशिश कर रही है, जिससे समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को उसका हक समय पर मिल सके।

