हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश के बाद अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने इस रणनीतिक समुद्री मार्ग की पूर्ण नाकाबंदी कर दी है। ट्रंप प्रशासन का यह कदम ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्र में उसकी बढ़ती सैन्य गतिविधियों के जवाब में उठाया गया है। व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि यह घेराबंदी तब तक जारी रहेगी जब तक ईरान अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करने के लिए तैयार नहीं हो जाता।
राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया के माध्यम से ईरान को अब तक की सबसे सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने साफ लहजे में कहा है कि यदि ईरान का कोई भी युद्धपोत या संदिग्ध जहाज इस घेराबंदी को तोड़ने का प्रयास करता है, तो अमेरिकी सेना उसे तुरंत नष्ट कर देगी। ट्रंप ने ट्वीट किया, “अगर उन्होंने हमारी सीमा या नियमों को चुनौती दी, तो हम उनके जहाजों को समुद्र की गहराई में भेज देंगे।” इस बयान ने खाड़ी क्षेत्र में युद्ध की आशंका को और गहरा कर दिया है।
अमेरिकी सैन्य सूत्रों के अनुसार, इस अभियान को ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ का नाम दिया गया है। खाड़ी में अमेरिका के अत्याधुनिक लड़ाकू विमान F-35 और F-22 रैप्टर लगातार गश्त कर रहे हैं, जबकि समुद्र में विध्वंसक युद्धपोतों (Destroyers) ने मोर्चा संभाल लिया है। अमेरिकी नौसेना को निर्देश दिए गए हैं कि वे किसी भी उकसावे वाली कार्रवाई का जवाब “अत्यधिक बल” के साथ दें। इसके साथ ही, ईरान द्वारा समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाने का काम भी युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है।

इस नाकाबंदी का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ने की संभावना है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है, जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है। इस मार्ग के बंद होने या बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका है। भारत और चीन जैसे देशों के लिए, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस मार्ग पर निर्भर हैं, यह स्थिति एक बड़ी आर्थिक चुनौती बन सकती है।
दूसरी ओर, ईरान ने इस कार्रवाई को अपनी संप्रभुता पर हमला और “युद्ध की खुली घोषणा” बताया है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने पलटवार करते हुए कहा है कि उनके पास इस क्षेत्र को ‘दुश्मन की कब्रगाह’ बनाने की क्षमता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस समय बेहद चिंतित है और संयुक्त राष्ट्र सहित कई देश दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रहे हैं, ताकि दुनिया को एक और विनाशकारी युद्ध से बचाया जा सके।

