ताजा जानकारी के अनुसार, वर्तमान में भारतीय ध्वज वाले कुल 16 जहाज हॉर्मुज के पश्चिमी हिस्से यानी फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। इन जहाजों में न केवल कच्चे तेल के टैंकर, बल्कि एलएनजी (LNG), एलपीजी (LPG), कंटेनर पोत, और रासायनिक पदार्थ ले जाने वाले जहाज भी शामिल हैं। नौसेना की ओर से सख्त निर्देश हैं कि जब तक जोखिम का सटीक आकलन नहीं हो जाता, तब तक इन जहाजों की आवाजाही को रोकना ही सुरक्षा की दृष्टि से उचित है। भारतीय नौसेना इन जहाजों की हर हलचल पर पैनी नजर बनाए हुए है।
इस क्षेत्र में जोखिम का अंदाजा गुरुग्राम स्थित भारतीय नौसेना के इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर (IFC-IOR) के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। युद्ध की शुरुआत से लेकर 6 अप्रैल तक फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के आसपास कुल 30 गंभीर घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें से 23 जहाजों को सीधे तौर पर ड्रोन और मिसाइल हमलों का निशाना बनाया गया, जिसमें अब तक 10 लोगों की जान जा चुकी है। यह अस्थिरता दर्शाती है कि यह जलमार्ग फिलहाल अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए कितना खतरनाक बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय नौसेना की निरंतर निगरानी और प्रभावी तालमेल ही इस संकट के समय में भारतीय संपत्ति और चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है। वर्तमान में एलपीजी पोत ‘जग विक्रम’ शारजाह में खड़ा होकर नेवी के अगले निर्देशों का इंतजार कर रहा है। सरकारी सूत्रों के हवाले से खबर है कि नौसेना जल्द ही 5 से 6 जहाजों के पहले बैच को हरी झंडी दे सकती है, जिसके बाद वे सुरक्षा घेरे में हॉर्मुज को पार कर सकेंगे। इसके लिए ईरानी अधिकारियों और चालक दल के साथ कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी है।
जंग के इस दौर में अब तक कुल 25 भारतीय जहाज इस संवेदनशील क्षेत्र में मौजूद थे, जिनमें से 9 जहाजों को भारतीय नौसेना की मदद से सुरक्षित रूप से निकाला जा चुका है। नौसेना ने अपने एस्कॉर्ट (सुरक्षा) अभियानों में कोई ढील नहीं दी है और वह जहाजों को ओमान की खाड़ी तक सुरक्षित सुरक्षा कवच प्रदान कर रही है। भारतीय नौसेना की यह सक्रियता न केवल व्यापारिक हितों की रक्षा कर रही है, बल्कि समुद्र में भारतीय ध्वज की गरिमा और सुरक्षा को भी बनाए हुए है।
दूसरी ओर, ईरान की ओर से मिल रहे संकेत इस जलमार्ग पर कड़े नियंत्रण की संभावना जता रहे हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं गहरी हो गई हैं। दुनिया के तेल व्यापार का एक बहुत बड़ा हिस्सा हॉर्मुज से होकर ही गुजरता है, ऐसे में यहां की थोड़ी सी भी अस्थिरता पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में बातचीत और सुरक्षा प्रयासों के जरिए स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होगी और जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो सकेगी।

