करीब 40 दिनों से चल रहे विनाशकारी युद्ध के बाद, अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति बन गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दी गई कड़ी समय-सीमा के समाप्त होने से कुछ ही देर पहले इस समझौते की घोषणा की गई। इस सीजफायर ने न केवल मध्य पूर्व में जारी तनाव को कम किया है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी बड़ी राहत दी है। समझौते के तहत अगले 15 दिनों तक दोनों देश एक-दूसरे पर कोई सैन्य हमला नहीं करेंगे।
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने इस शांति समझौते का पूरा श्रेय पड़ोसी देश पाकिस्तान को दिया है। अराघची ने विशेष रूप से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके “भाईचारे के संदेश” और कूटनीतिक प्रयासों ने ही इस युद्ध को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शांति वार्ता का अगला दौर अब पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित किया जाएगा, जिसे मध्यस्थता का केंद्र माना जा रहा है।
इस समझौते का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा दुनिया के सबसे व्यस्त तेल मार्ग, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) का खुलना है। ईरान इस जलमार्ग को सुरक्षित यातायात के लिए फिर से खोलने पर सहमत हो गया है। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने स्पष्ट किया है कि यदि हमले पूरी तरह बंद रहते हैं, तो ईरानी सशस्त्र बल अपनी रक्षात्मक कार्रवाइयों को रोक देंगे और तेल के टैंकरों के सुरक्षित मार्ग के लिए तकनीकी सहयोग प्रदान करेंगे।
युद्धविराम की खबर मिलते ही ईरान की राजधानी तेहरान में जश्न का माहौल बन गया। बुधवार सुबह हजारों लोग सड़कों पर उतर आए और ईरानी झंडे लहराते हुए अपनी खुशी जाहिर की। हालांकि, इस जश्न के बीच एक गमगीन माहौल भी दिखा, क्योंकि लोग ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की तस्वीरें लिए हुए थे। बता दें कि खामेनेई की मौत युद्ध के पहले ही दिन, 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के एक हमले में हुई थी, जिसके बाद यह भीषण जंग छिड़ी थी।
कूटनीतिक स्तर पर देखा जाए तो अमेरिका ने 15 बिंदुओं वाला एक विस्तृत प्रस्ताव पेश किया था, जबकि ईरान ने अपना 10 बिंदुओं का एक ढांचा रखा था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के प्रस्ताव को बातचीत के आधार के रूप में स्वीकार कर लिया है, जो कि ट्रंप की पिछली कठोर नीतियों के मुकाबले एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। हालांकि, अमेरिका के भीतर इस समझौते को लेकर राजनीति तेज है और कई विपक्षी सांसदों ने ट्रंप की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उनके इस्तीफे तक की मांग की है।
आर्थिक मोर्चे पर इस समझौते का असर तत्काल देखने को मिला। युद्धविराम के ऐलान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों में 17% से ज्यादा की भारी गिरावट दर्ज की गई। तेल बाजार में स्थिरता लौटने की उम्मीद के कारण जापान और दक्षिण कोरिया सहित एशियाई शेयर बाजारों में जोरदार तेजी आई है। निवेशकों ने इस शांति समझौते को वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक संजीवनी की तरह देखा है।
फिलहाल यह सीजफायर केवल दो हफ्तों के लिए है, लेकिन इसे एक स्थायी शांति समझौते की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है। पूरी दुनिया की नजरें अब इस्लामाबाद में होने वाली अगली बातचीत पर टिकी हैं। यदि यह दो हफ्ते शांतिपूर्ण बीतते हैं, तो यह मध्य पूर्व के भविष्य के लिए एक नया अध्याय साबित हो सकता है।

