पश्चिम एशिया में पिछले 40 दिनों से जारी भीषण तनाव के बीच एक बड़ी राहत की खबर आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ दो सप्ताह के द्विपक्षीय युद्धविराम (Ceasefire) का आधिकारिक ऐलान किया है। यह समझौता उस समय हुआ जब ट्रंप द्वारा ईरान को दी गई 48 घंटे की कड़ी मोहलत समाप्त होने वाली थी। इस समझौते से न केवल दोनों देशों के बीच सीधे सैन्य टकराव पर रोक लगी है, बल्कि वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति और सुरक्षा को लेकर बनी चिंताएं भी कुछ कम हुई हैं।
युद्धविराम की सबसे महत्वपूर्ण शर्तों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना है। ईरान इस वैश्विक व्यापारिक मार्ग को खोलने के लिए राजी हो गया है, जिससे अब तेल, गैस और अन्य वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही संभव हो सकेगी। समझौते के तहत ईरानी सेना इन जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। इसके बदले में, अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर अपनी बमबारी और सैन्य हमलों को तत्काल प्रभाव से स्थगित करने का फैसला किया है।
इस कूटनीतिक जीत में पाकिस्तान ने एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर जानकारी दी कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की विशेष अपील के बाद उन्होंने हमलों को टालने का निर्णय लिया। ट्रंप ने पाकिस्तान के इस प्रयास की सराहना की है, वहीं ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने भी पाकिस्तानी नेतृत्व का इस शांति पहल के लिए औपचारिक धन्यवाद दिया है।
ट्रंप ने अपने बयान में दावा किया कि अमेरिका ने अपने अधिकांश सैन्य लक्ष्यों को पहले ही हासिल कर लिया है और अब बातचीत एक निर्णायक मोड़ पर है। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि वॉशिंगटन को तेहरान की ओर से एक 10-सूत्रीय प्रस्ताव प्राप्त हुआ है, जिसे वे बातचीत के लिए एक ठोस आधार मान रहे हैं। ट्रंप का मानना है कि यह अस्थायी युद्धविराम एक दीर्घकालिक और व्यापक शांति समझौते की दिशा में पहला बड़ा कदम साबित हो सकता है।
व्हाइट हाउस की ओर से प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने स्पष्ट किया कि यह सीजफायर सशर्त है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप का कड़ा रुख ही आगे की दिशा तय करेगा। लेविट के अनुसार, अमेरिका की सैन्य शक्ति और रणनीतिक दबाव के कारण ही ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने पर मजबूर हुआ है। उन्होंने संकेत दिए कि आने वाले दो हफ्तों में गहन राजनयिक चर्चाएं जारी रहेंगी ताकि भविष्य की रूपरेखा तैयार की जा सके।

यह ऐतिहासिक ऐलान ईरान के लिए भावनात्मक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण है। बुधवार सुबह जैसे ही युद्धविराम की खबर तेहरान पहुँची, लोग सड़कों पर उतर आए और राष्ट्रीय ध्वज लहराकर जश्न मनाया। यह जश्न ऐसे समय में हो रहा है जब ईरान अपने पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत का 40वां दिन मना रहा है। खामेनेई की मृत्यु 28 फरवरी को एक एयरस्ट्राइक के दौरान हुई थी, जिसके बाद से ही क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बने हुए थे।

धार्मिक परंपराओं के अनुसार, ईरान में किसी की मृत्यु का 40वां दिन (चेहलुम) श्रद्धांजलि देने का एक बड़ा अवसर होता है। आज पूरे ईरान में खामेनेई के समर्थक जुट रहे हैं, लेकिन युद्धविराम की घोषणा ने गम के माहौल को कुछ हद तक राहत में बदल दिया है। तेहरान की सड़कों पर सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बीच आम नागरिक शांति की उम्मीद में पोस्टर और तस्वीरें लेकर निकले हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह 14 दिनों की अवधि दुनिया के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि इन दो हफ्तों में बातचीत सफल रहती है, तो मध्य पूर्व में एक नए युग की शुरुआत हो सकती है। हालांकि, इजराइल का रुख और ईरान द्वारा दी गई शर्तों का पालन इस समझौते की सफलता के लिए अनिवार्य होगा। फिलहाल, पूरी दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह अस्थायी शांति एक स्थायी समझौते का रूप ले पाएगी।

