भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तैयारियों को अंतिम रूप देते हुए अपने उम्मीदवारों की पांचवीं सूची जारी कर दी है। नई दिल्ली में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा जारी इस सूची में पांच नए उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की गई है। इसके अलावा, रणनीतिक बदलाव करते हुए पार्टी ने तीन विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशियों को बदलते हुए संशोधित सूची भी पेश की है। चुनाव की तारीखें नजदीक आते ही बीजेपी का यह कदम राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा फैसला माना जा रहा है।
पांचवीं सूची के मुख्य नामों पर नजर डालें तो पार्टी ने दमदम उत्तर से सौरव सिकदार को मैदान में उतारा है, जो पूर्व केंद्रीय मंत्री तपन सिकदार के परिवार से ताल्लुक रखते हैं। वहीं, कृष्णानगर उत्तर जैसी महत्वपूर्ण सीट से तारकनाथ चटर्जी और कल्याणी से अनुपम बिस्वास को टिकट दिया गया है। इसके अलावा मध्यग्राम से अनिंद्य राजू बनर्जी और उलूबेरिया पूर्व से रुद्रप्रसाद बनर्जी को उम्मीदवार बनाया गया है। इन नामों के चयन में स्थानीय प्रभाव और जातिगत समीकरणों का विशेष ध्यान रखा गया है।
पार्टी ने केवल नए नाम ही नहीं जोड़े, बल्कि तीन सीटों पर उम्मीदवारों को बदलकर यह संकेत दिया है कि वे जीत के समीकरणों के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहते। संशोधित सूची के अनुसार, अब बशीरहाट उत्तर से कौशिक सिद्धार्थ, विष्णुपुर से अभिजीत सरदार और बेहाला पूर्व जैसी हाई-प्रोफाइल सीट से शंकर सिकदार को प्रत्याशी बनाया गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के फीडबैक को देखते हुए ही यह बदलाव किए गए हैं।
बीजेपी अब तक राज्य की कुल 294 सीटों में से 292 पर अपने योद्धाओं का ऐलान कर चुकी है। पार्टी ने चरणबद्ध तरीके से पहली लिस्ट में 144, दूसरी में 111, तीसरी में 19 और चौथी में 13 उम्मीदवारों के नाम घोषित किए थे। अब केवल दो सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा होना शेष है। वहीं, राज्य की सत्ता पर काबिज तृणमूल कांग्रेस (TMC) पहले ही सभी 294 सीटों पर अपने पत्ते खोल चुकी है, जिससे अब बंगाल के चुनावी रण का पूरा खाका तैयार हो चुका है।
निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, पश्चिम बंगाल में इस बार मतदान की प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की जाएगी। पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को होगा, जबकि दूसरे और अंतिम चरण के लिए 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। इस चुनाव के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। दो चरणों के छोटे चुनावी कार्यक्रम ने राजनीतिक दलों को कम समय में अधिक मेहनत करने पर मजबूर कर दिया है, जिससे चुनावी सरगर्मी काफी बढ़ गई है।
चुनाव के करीब आते ही बंगाल की राजनीति का पारा सातवें आसमान पर है। प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और अन्य केंद्रीय नेताओं के दौरों से बीजेपी कार्यकर्ता उत्साहित हैं, वहीं ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस अपनी सत्ता बचाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है। उम्मीदवारों की यह सूची न केवल चेहरों का चयन है, बल्कि यह बीजेपी की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वे राज्य में ‘परिवर्तन’ का दावा कर रहे हैं।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इन उम्मीदवारों के चयन का जनता पर क्या प्रभाव पड़ता है। बयानों और रैलियों का दौर तेज हो चुका है और 4 मई के परिणाम ही यह तय करेंगे कि बंगाल की जनता ने किस दल के विजन और नेतृत्व पर अपना भरोसा जताया है। यह चुनाव न केवल राज्य के लिए बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण दिशा तय करने वाला साबित होगा।

