रियाद के सुरक्षित ‘डिप्लोमैटिक क्वार्टर’ में स्थित अमेरिकी दूतावास पर हुए हमले को लेकर अब यह साफ हो गया है कि यह कोई मामूली घटना नहीं थी। ताजा मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 3 मार्च की रात दो ड्रोनों ने दूतावास परिसर को निशाना बनाया। पहला ड्रोन एयर डिफेंस सिस्टम को भेदते हुए सीधे इमारत से टकराया, जबकि दूसरे ड्रोन ने ठीक उसी स्थान पर प्रहार किया जिससे भीषण विस्फोट हुआ। शुरुआती दावों के उलट, इस हमले में दूतावास की तीन मंजिलों को गंभीर नुकसान पहुँचा है और यहाँ स्थित अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA का स्टेशन भी इसकी चपेट में आया है।
इस हमले की सबसे चौंकाने वाली बात इसकी तकनीकी सटीकता रही। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह से ड्रोनों ने सऊदी अरब के सुरक्षा घेरे को चकमा दिया, वह हमलावर की उच्च क्षमता को दर्शाता है। पूर्व CIA अधिकारियों के मुताबिक, यह हमला एक सीधा संदेश है कि अब क्षेत्र के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले अमेरिकी ठिकाने भी सुरक्षित नहीं रह गए हैं। रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि एक ड्रोन ने दूतावास के करीब स्थित अमेरिकी राजनयिक के आवास को भी निशाना बनाने की कोशिश की थी, जिससे खतरा और भी गहरा गया है।
राजनीतिक स्तर पर इस हमले ने आरोपों का नया दौर शुरू कर दिया है। शुरुआत में अमेरिका और उसके सहयोगियों ने इस हमले के पीछे ईरान का हाथ होने का शक जताया था। हालांकि, ईरान की ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे इजरायल की साजिश बताया है। ईरान का दावा है कि यह एक ‘फॉल्स फ्लैग’ ऑपरेशन हो सकता है, जिसका मकसद ईरान को बदनाम करना और क्षेत्रीय तनाव को और भड़काना है। ईरान ने स्पष्ट किया कि दूतावास उसके लक्ष्यों की सूची में शामिल नहीं था।
इस घटना के बाद सऊदी अरब की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी अधिकारियों ने शुरुआत में इस हमले की गंभीरता को छिपाने की कोशिश की थी और इसे केवल एक “मामूली आग” करार दिया था। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ऐसा शायद क्षेत्र में अपनी सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरी को छिपाने के लिए किया गया। फिलहाल, इस हमले ने मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच पहले से ही जारी तनाव में घी डालने का काम किया है, जिससे आने वाले दिनों में संघर्ष और गहराने की आशंका है।

