नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में गहराते तनाव और युद्ध की स्थितियों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार शाम अपने आवास पर कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस महत्वपूर्ण बैठक का मुख्य उद्देश्य खाड़ी देशों में जारी संघर्ष के कारण भारत की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का गहराई से आकलन करना था। पिछले 10 दिनों के भीतर CCS की यह दूसरी बैठक है, जो इस बात का संकेत देती है कि भारत सरकार वैश्विक हालातों को लेकर कितनी सतर्क है।
बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सहित कैबिनेट के कई वरिष्ठ सहयोगी शामिल हुए। इसके अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन ने प्रधानमंत्री को मौजूदा सुरक्षा परिदृश्य और अंतरराष्ट्रीय स्थिति पर एक विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया। चर्चा के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर जो अस्थिरता पैदा हुई है, उससे भारत के हितों को सुरक्षित रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
बैठक का एक बड़ा हिस्सा आम नागरिकों की रोजमर्रा की जरूरतों पर केंद्रित रहा। सरकार ने विशेष रूप से खाद्य सामग्री, LPG और पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता की समीक्षा की। पश्चिम एशिया से तेल और गैस की आपूर्ति बाधित न हो और देश के भीतर ईंधन की कीमतों पर इसका विपरीत असर न पड़े, इसके लिए भविष्य की रणनीति तैयार की गई। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि वे बाजार पर नजर रखें ताकि संकट की स्थिति में भी आम जनता को किसी प्रकार की कमी या महंगाई का सामना न करना पड़े।
कैबिनेट सचिव द्वारा दी गई रिपोर्ट में केवल तत्काल चुनौतियों का ही नहीं, बल्कि मध्यम और दीर्घकालिक प्रभावों का भी जिक्र किया गया। चर्चा के दौरान कृषि, उर्वरक, MSMEs, निर्यात और शिपिंग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को लेकर मंथन हुआ। चूंकि भारत का एक बड़ा व्यापारिक मार्ग और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) इस क्षेत्र से होकर गुजरती है, इसलिए निर्यातकों को होने वाले नुकसान को कम करने और वैकल्पिक मार्गों या सुरक्षा उपायों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक के दौरान चिंता व्यक्त की कि यह संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है और इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि यह एक बदलती हुई स्थिति है, जिसके लिए सरकार के हर विभाग को सजग रहने की जरूरत है। पीएम ने स्पष्ट निर्देश दिया कि सरकार के सभी मंत्रालय और विभाग आपसी तालमेल के साथ “एक इकाई” की तरह काम करें। उनका मुख्य विजन यह है कि वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद भारतीय नागरिकों को न्यूनतम असुविधा हो और देश की विकास दर पर आंच न आए।
अंत में, बैठक में विभिन्न मंत्रालयों द्वारा अब तक उठाए गए निवारक कदमों की भी समीक्षा की गई। सरकार ने यह सुनिश्चित करने का संकल्प लिया कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा को लेकर किसी भी जोखिम के लिए पूरी तरह तैयार है। रक्षा और सुरक्षा के मोर्चे पर भी भारतीय सीमाओं और समुद्री व्यापारिक मार्गों की निगरानी बढ़ाने पर सहमति बनी, ताकि अंतरराष्ट्रीय संकट के इस दौर में भारत की स्थिति मजबूत बनी रहे।

