मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक बड़े संकट की दहलीज पर खड़ा कर दिया है। इस भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा गया, जो हाल ही में $119 प्रति बैरल के स्तर तक पहुँच गई थीं। हालांकि, वर्तमान में कीमतें घटकर $100 के आसपास आई हैं, लेकिन बाजार अब भी बेहद अस्थिर बना हुआ है। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने चेतावनी दी है कि यदि यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो सरकार को MSME सेक्टर और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को बचाने के लिए जल्द ही नए राहत पैकेज घोषित करने पड़ सकते हैं।
घरेलू मोर्चे पर आम जनता को महंगाई की मार से बचाने के लिए भारत सरकार ने कड़े और एहतियाती कदम उठाए हैं। सूत्रों के अनुसार, सरकार ने पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क घटाकर ₹3 प्रति लीटर कर दिया है, जबकि डीजल को इस कर से पूरी तरह मुक्त कर दिया गया है। इसके अलावा, देश के भीतर ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए डीजल और एटीएफ (ATF) के निर्यात पर फिर से शुल्क लगा दिया गया है, ताकि निजी रिफाइनरियां घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता दें।
विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के राजकोषीय घाटे और मुद्रास्फीति (Inflation) पर दबाव डाल सकती हैं। सरकार की प्राथमिकता अब सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले व्यवसायों और परिवारों को ‘टारगेटेड’ यानी लक्षित राहत देने की है। आने वाले समय में वैश्विक स्थिति को देखते हुए बजट आवंटन में बदलाव और संसाधनों की नई रणनीति तैयार करना अनिवार्य हो गया है, ताकि भारतीय अर्थव्यवस्था को इस वैश्विक झटके से सुरक्षित रखा जा सके।

