वैश्विक स्तर पर गहराते ऊर्जा संकट और आपूर्ति श्रृंखला में आ रही बाधाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। सरकार ने देश के 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत ‘सुपीरियर केरोसिन ऑयल’ (SKO) के वितरण को आसान बनाने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। भारत के राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के अनुसार, इस पहल का मुख्य उद्देश्य भू-राजनीतिक तनाव के बीच समाज के सबसे कमजोर वर्गों के लिए ईंधन की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
इस नई व्यवस्था के तहत, सरकार ने तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को पेट्रोलियम अधिनियम और नियमों में विशेष ढील प्रदान की है। अब मौजूदा पेट्रोल पंपों पर अस्थायी रूप से 2,500 लीटर तक केरोसिन का भंडारण किया जा सकेगा। पहले पेट्रोल पंपों पर केरोसिन के भंडारण और वितरण को लेकर कड़े सुरक्षा मानक और सीमाएं थीं, लेकिन वर्तमान ऊर्जा सुरक्षा की जरूरतों को देखते हुए प्रशासन ने इन नियमों में लचीलापन दिखाने का निर्णय लिया है।
यह कदम उन ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के लिए अत्यंत राहतकारी माना जा रहा है, जहां घरेलू गैस (LPG) या अन्य आधुनिक ईंधनों की पहुंच अभी भी सीमित है। पेट्रोल पंपों के व्यापक नेटवर्क का उपयोग करके सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि केरोसिन की आपूर्ति अंतिम छोर तक निर्बाध रूप से बनी रहे। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर ईंधन की कमी दूर होगी, बल्कि आपातकालीन स्थिति में आम जनता को बाजार की अनिश्चितताओं से भी सुरक्षा मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह मौजूदा बुनियादी ढांचे (पेट्रोल पंपों) का उपयोग करके वितरण लागत को कम करता है। परिवहन और रसद (Logistics) की चुनौतियों को कम करके, सरकार कीमतों को नियंत्रित रखने और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने का प्रयास कर रही है। यह पहल वैश्विक ऊर्जा कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव से आम नागरिकों को बचाने की दिशा में एक प्रभावी ढाल साबित हो सकती है।
अंततः, यह अधिसूचना केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं है, बल्कि देश की ‘ऊर्जा सुरक्षा नीति’ में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। नियमों में दी गई यह छूट यह स्पष्ट करती है कि सरकार भविष्य में संभावित किसी भी बड़े ऊर्जा संकट से निपटने के लिए पूर्व-तैयारी कर रही है, ताकि विकास की गति और गरीब परिवारों की रसोई पर इसका प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

