बॉलीवुड और विवादों का चोली-दामन का साथ रहा है। हाल ही में बादशाह का गाना ‘टटीरी’ और नोरा फतेही-संजय दत्त का ट्रैक ‘सरके चुनर तेरी’ अपनी लिरिक्स और प्रस्तुति के कारण सोशल मीडिया पर भारी विरोध का सामना कर रहे हैं। बढ़ते विवाद के चलते इन गानों को यूट्यूब और अन्य म्यूजिक प्लेटफॉर्म्स से हटा दिया गया है।
लेकिन गानों पर प्रतिबंध और सेंसरशिप की यह कहानी नई नहीं है। आज से ठीक 55 साल पहले, भारतीय सिनेमा की एक ऐसी ही फिल्म और उसके गाने ने पूरे देश में हड़कंप मचा दिया था।
‘दम मारो दम’: जब हिप्पी कल्चर ने हिला दी थी संस्कृति की नींव
साल 1971 में देव आनंद की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ रिलीज हुई। इस फिल्म का गाना ‘दम मारो दम’ युवाओं के बीच देखते ही देखते ‘एंथम’ बन गया। आशा भोसले की जादुई आवाज, आर.डी. बर्मन का क्रांतिकारी संगीत और आनंद बख्शी के बोलों ने इसे अमर बना दिया, लेकिन साथ ही विवादों का पहाड़ भी खड़ा कर दिया।
विवाद की मुख्य वजहें:
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नशे का महिमामंडन: गाने में जीनत अमान को हिप्पी अंदाज में चिलम के कश लगाते दिखाया गया था। आलोचकों का आरोप था कि यह युवाओं को नशे की ओर धकेल रहा है।
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भारतीय संस्कृति पर चोट: उस दौर के रूढ़िवादी समाज ने इसे भारतीय संस्कारों के खिलाफ माना।
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सेंसरशिप का प्रहार: विवाद इतना बढ़ा कि ऑल इंडिया रेडियो ने गाने को बजाने पर बैन लगा दिया। यहाँ तक कि सालों बाद जब फिल्म दूरदर्शन पर प्रसारित हुई, तो इस गाने को फिल्म से पूरी तरह काट दिया गया था।
पंचम दा और देव आनंद के बीच का ‘सुर संग्राम’
कहा जाता है कि खुद देव आनंद इस गाने के प्रभाव से डर गए थे। उन्हें अंदेशा था कि यह गाना फिल्म की कहानी और उनके किरदार पर भारी पड़ जाएगा। उन्होंने आर.डी. बर्मन (पंचम दा) से गाने में बदलाव करने को कहा था, लेकिन पंचम दा ने अपनी कलात्मक दूरदर्शिता पर भरोसा रखा और इसे बदलने से इनकार कर दिया।
पुराने विवाद बनाम आज के विवाद
आज के दौर में गानों पर विवाद अक्सर धार्मिक भावनाओं या अश्लीलता के इर्द-गिर्द घूमते हैं। बादशाह और नोरा फतेही के हालिया गानों का डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटना यह दर्शाता है कि अब ‘पब्लिक सेंटीमेंट’ तुरंत असर दिखाता है।
विशेष टिप्पणी: जहाँ ‘दम मारो दम’ को बैन का सामना करना पड़ा, वहीं समय ने इसे एक ‘कल्ट क्लासिक’ बना दिया। आज यह गाना ड्रग्स के प्रचार के रूप में नहीं, बल्कि बॉलीवुड के संगीत इतिहास के एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में देखा जाता है।

