मार्च 2026 की शुरुआत से ईरान (तेहरान) और इज़रायल के बीच तनाव अपने उच्चतम स्तर पर है। तेहरान ने हाल ही में इज़रायल और मध्य पूर्व के सैन्य एवं आर्थिक बुनियादी ढांचे को “पूरी तरह से नष्ट” करने की गंभीर धमकी दी है। ईरान ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका और इज़रायल ने ईरान में सत्ता परिवर्तन की कोशिश की, तो वह इज़रायल के डिमोनिया परमाणु केंद्र को निशाना बनाएगा। ईरान के सेमी-ऑफिसियल ISNA न्यूज एजेंसी ने ईरानी के एक सैन्य अधिकारी के हवाले से इसकी जानकारी दी है। ईरानी सैन्य अधिकारी की चेतावनी उस वक्त आई है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधनमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बार बार सत्ता परिवर्तन को लेकर चेतावनी दी है। हालांकि कुछ अधिकारियों का कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप अचानक शर्तें पूरी होने की बात कहकर युद्ध से पीछे भी हट सकते हैं, लेकिन सीनियर इजरायली अधिकारियों के हवाले से जेरूशलम पोस्ट ने कहा है कि ‘ट्रंप तब तक युद्ध में बने रहेंगे जब तक असल में ईरान में सरकार बदलना संभव नहीं हो जाएगा।
डिमोना न्यूक्लियर साइट को आधिकारिक तौर पर शिमोन पेरेस नेगेव न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर कहा जाता है। ये इजरायल के नेगेव रेगिस्तान में स्थित एक बेहद गुप्त परमाणु केंद्र है। इजरायल ने इसे फ्रांस की गुप्त तकनीकी की मदद से इसका निर्माण किया था।
लेकिन अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और खुफिया एजेंसियों का मानना है कि यह इजरायल के परमाणु हथियार कार्यक्रम का केंद्र है। माना जाता है कि यहां प्लूटोनियम का उत्पादन किया जाता है जो परमाणु बम बनाने के काम आता है।
हालिया सयम में कुछ सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए दावा किया गया है कि इस साइट पर नये सिरे से निर्माण कार्य हो रहे हैं। यह क्षेत्र दुनिया के सबसे सुरक्षित इलाकों में से एक है। यहां की सुरक्षा इतनी कड़ी है कि इसके ऊपर से विमान उड़ाना भी प्रतिबंधित है।
अमेरिकी और इजरायली अधिकारियों ने कहा है कि ईरानी सरकार अभी मौजूदा हालात को संभालने में जूझ रही है इसकी वजह न सिर्फ सीनियर सरकार और मिलिट्री लीडर्स को हुआ नुकसान है, खासकर ऑपरेशन के शुरुआती पलों में, बल्कि मिड-लेवल कमांडरों, फील्ड यूनिट्स और कमांड सेंटर्स पर हुए हमले भी हैं।
यह संघर्ष 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था, जब इज़रायल और अमेरिका ने “ऑपरेशन रोरिंग लॉयन” (Operation Roaring Lion) के तहत ईरान पर समन्वित हमले किए थे।

