नई दिल्ली/रायपुर: रायपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद और वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल स्वच्छ पर्यावरण और प्रकृति संरक्षण को लेकर लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनका मानना है कि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य देने के लिए पर्यावरण संरक्षण आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुकी है। इसी कड़ी में सांसद अग्रवाल ने सोमवार को लोकसभा में ‘ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम’ (GCP) के अंतर्गत कार्बन कम करने वाले पौधों को लगाने का महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया।
अग्रवाल के प्रश्न के जवाब में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पर्यावरण संरक्षण और वन पुनर्स्थापन को बढ़ावा देने के लिए देश के विभिन्न राज्यों में अवक्रमित वन क्षेत्रों का चयन किया गया है, जहाँ पारिस्थितिक तंत्र को फिर से जीवित करने का कार्य चल रहा है।
सदन में दी गई जानकारी के अनुसार, ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम के तहत पूरे देश में कुल 4391 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधरोपण किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य में 536 हेक्टेयर भूमि पर नए वन उगाए जा रहे हैं। वहीं, गुजरात में सबसे ज्यादा 975 हेक्टेयर और मध्य प्रदेश में 640 हेक्टेयर क्षेत्र में कार्बन सोखने वाले पौधों को लगाया जा रहा है।
मंत्री ने बताया कि पौधों के जीवित रहने की निगरानी सुनिश्चित करने के लिए कड़े मानक तय किए गए हैं। इस कार्यक्रम के तहत उन क्षेत्रों के लिए क्रेडिट कार्ड जारी किए जाते हैं, जो 40% कैनोपी घनत्व प्राप्त कर लेते हैं। इससे यह सुनिश्चित होता है कि लगाए गए पौधे न केवल जीवित रहें, बल्कि एक घने जंगल का रूप भी ले सकें।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने चर्चा के दौरान कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने विश्वास जताया कि ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम के माध्यम से वृक्षारोपण और वन पुनर्स्थापन के कार्यों को नया प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे वातावरण में हरियाली बढ़ेगी और लोगों को शुद्ध हवा मिल सकेगी।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि देश में पर्यावरण संरक्षण को एक जन आंदोलन का रूप दिया जा रहा है। ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम इसी दिशा में एक बड़ी पहल है, जिसके माध्यम से सरकारी और निजी संस्थाओं की भागीदारी से पर्यावरण के अनुकूल गतिविधियों को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है।
सांसद अग्रवाल ने यह भी रेखांकित किया कि इस कार्यक्रम से न केवल वन क्षेत्रों का संरक्षण होगा, बल्कि कार्बन फुटप्रिंट में भी बड़ी कमी आएगी। इसके साथ ही जल स्रोतों का संरक्षण होगा और स्थानीय समुदायों को रोजगार व आजीविका के नए अवसर प्राप्त होंगे, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 12 अक्टूबर 2023 को ग्रीन क्रेडिट नियम लागू किए थे। इसका मुख्य उद्देश्य स्वैच्छिक आधार पर पर्यावरण के अनुकूल कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करना है। भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRE) देहरादून इस पूरे कार्यक्रम के प्रबंधन और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मुख्य प्रशासक के रूप में कार्य कर रही है।
नियमों के अनुसार, ग्रीन क्रेडिट तभी प्राप्त किया जा सकता है जब कम से कम 5 वर्षों का पुनर्स्थापना कार्य पूरा हो चुका हो। साथ ही, क्षेत्र में कम से कम 40% का कैनोपी घनत्व होना अनिवार्य है। इसके लिए स्थानीय जलवायु के अनुकूल प्रजातियों के पौधों का उपयोग करना आवश्यक है ताकि प्रकृति का बेहतर और स्थायी संरक्षण किया जा सके।

