रायपुर: छत्तीसगढ़ की आधी आबादी को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और संपत्ति का स्वामी बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की दूरगामी सोच और वित्त मंत्री ओपी चौधरी के कुशल नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने महिलाओं के नाम पर होने वाले भूमि पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) शुल्क में 50 प्रतिशत की कटौती करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इस महत्वपूर्ण फैसले की आधिकारिक अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित कर दी गई है, जिससे यह तत्काल प्रभाव से पूरे राज्य में लागू हो गया है।
इस निर्णय का प्राथमिक उद्देश्य महिलाओं को संपत्ति अर्जन के लिए न केवल प्रोत्साहित करना है, बल्कि उन्हें समाज में एक ठोस पहचान दिलाना भी है। सरकार का मानना है कि इस भारी छूट के बाद अब अधिक से अधिक परिवार अपनी अचल संपत्ति, जैसे जमीन और मकान, महिलाओं के नाम पर दर्ज कराने के लिए प्रेरित होंगे। संपत्ति का मालिकाना हक मिलने से महिलाओं की सामाजिक स्थिति मजबूत होगी और उनकी आर्थिक सुरक्षा का दायरा भी बढ़ेगा। यह कदम महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में अधिक प्रभावी भूमिका निभाने के लिए सशक्त बनाएगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस पहल को ‘सशक्त महिला, सशक्त प्रदेश’ के विजन की दिशा में एक मील का पत्थर बताया है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार महिलाओं के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री का मानना है कि जब एक महिला के पास संपत्ति का कानूनी अधिकार होता है, तो उसका आत्मविश्वास कई गुना बढ़ जाता है। यह निर्णय केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के प्रति समाज के दृष्टिकोण को बदलने और उन्हें बराबरी का हक दिलाने का एक बड़ा प्रयास है।
राज्य के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने इस योजना के आर्थिक पहलुओं और इसके दूरगामी परिणामों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि रजिस्ट्रेशन शुल्क में दी गई इस रियायत से राज्य के खजाने पर लगभग 153 करोड़ रुपये का वित्तीय भार आएगा। हालांकि, उन्होंने इसे राजस्व की हानि मानने के बजाय ‘निवेश’ करार दिया। वित्त मंत्री के अनुसार, यह महिला सशक्तिकरण की दिशा में किया गया एक ऐसा निवेश है, जिसके सामाजिक और आर्थिक परिणाम भविष्य में प्रदेश की प्रगति में स्वर्ण अक्षरों में लिखे जाएंगे।
राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के प्रावधानों के अनुसार, अब राज्य के भीतर किसी भी प्रकार की अचल संपत्ति के हस्तांतरण के दस्तावेज यदि किसी महिला के पक्ष में निष्पादित किए जाते हैं, तो उन पर लागू होने वाले निर्धारित रजिस्ट्रेशन शुल्क को सीधे आधा कर दिया जाएगा। इस नियम के लागू होने से मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी, जो शुल्क की अधिकता के कारण अब तक महिलाओं के नाम पर संपत्ति पंजीकृत कराने से हिचकिचाते थे।
जानकारों का मानना है कि इस फैसले से छत्तीसगढ़ के रियल एस्टेट सेक्टर में भी नई जान आएगी। रजिस्ट्री शुल्क कम होने से संपत्तियों के लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ेगी और पंजीकरण की संख्या में भी इजाफा होने की उम्मीद है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ग्रामीण इलाकों में, जहाँ महिलाओं के नाम पर संपत्ति रखने का चलन कम है, वहां यह योजना एक बड़े बदलाव का वाहक बनेगी। यह निर्णय साबित करता है कि सरकार केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर महिलाओं को ‘संपत्ति का स्वामी’ बनाने के लिए संकल्पित है।
कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ सरकार का यह फैसला महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक प्रगतिशील सोच का परिचायक है। आर्थिक आत्मनिर्भरता से लेकर सामाजिक सम्मान तक, यह योजना महिलाओं के जीवन के हर पहलू को सकारात्मक रूप से प्रभावित करेगी। आने वाले समय में यह कदम न केवल छत्तीसगढ़ की महिलाओं को सशक्त करेगा, बल्कि देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक अनुकरणीय उदाहरण पेश करेगा।


