पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बुधवार को अपने उम्मीदवारों की तीसरी सूची जारी कर दी, जिसमें 19 प्रत्याशियों के नाम शामिल हैं। पार्टी ने इस सूची में सामाजिक समीकरणों और क्षेत्रीय प्रभाव को प्राथमिकता दी है। इस घोषणा के साथ ही भाजपा अब तक राज्य की कुल 294 सीटों में से अधिकांश पर अपने योद्धाओं के नाम साफ कर चुकी है, जिससे तृणमूल कांग्रेस के साथ उसका सीधा मुकाबला और भी रोचक हो गया है।
इस सूची का सबसे चर्चित नाम रत्ना देबनाथ का है, जिन्हें उत्तर 24 परगना की पानीहाटी सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। रत्ना देबनाथ आरजी कर अस्पताल की उस पीड़िता की मां हैं, जिनके साथ हुई त्रासदी ने पूरे देश को झकझोर दिया था। उन्हें टिकट देकर भाजपा ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह महिला सुरक्षा और ‘न्याय’ के मुद्दे को इस चुनाव में अपना सबसे बड़ा हथियार बनाने वाली है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह दांव सत्ताधारी दल के खिलाफ एक मजबूत भावनात्मक लहर पैदा कर सकता है।


सूची में उत्तर बंगाल और मालदा संभाग पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। कूचबिहार दक्षिण से रथीन्द्र नाथ बोस, राजगंज (अजा) से दिनेश सरकार और इंग्लिश बाजार से अमलन भादुरी जैसे अनुभवी चेहरों को मैदान में उतारा गया है। इसके अलावा, इस्लामपुर से चित्रजीत रॉय और हेमताबाद से हरिपद बर्मन के नामों की घोषणा कर पार्टी ने राजबंशी और स्थानीय समुदायों को साधने की कोशिश की है। पार्टी ने अनुभवी नेताओं के साथ-साथ नए चेहरों को मौका देकर संगठन में संतुलन बनाने का प्रयास किया है।
इससे पहले भाजपा अपनी दूसरी सूची में 111 और पहली सूची में 144 उम्मीदवारों के नाम घोषित कर चुकी है। दूसरी सूची में निसिथ प्रमाणिक और अर्जुन सिंह जैसे दिग्गज नेताओं के नाम शामिल थे, जो पहले ही अपने क्षेत्रों में प्रचार अभियान तेज कर चुके हैं। भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व इस बार ‘मिशन बंगाल’ को लेकर बेहद गंभीर नजर आ रहा है, जिसके तहत उम्मीदवारों के चयन में केवल उनकी जीत की संभावना (Winnability) को ही एकमात्र पैमाना बनाया गया है।
पश्चिम बंगाल में इस बार दो चरणों में मतदान होना है—पहला चरण 23 अप्रैल और दूसरा 29 अप्रैल 2026 को। वहीं, चुनाव के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। भाजपा की ओर से लगातार जारी हो रही सूचियों ने यह साफ कर दिया है कि वह चुनाव की तैयारियों में टीएमसी से पीछे नहीं रहना चाहती। अब देखना यह होगा कि 4 मई को बंगाल की जनता ‘परिवर्तन’ का साथ देती है या ममता बनर्जी की ‘हैट्रिक’ पर मुहर लगाती है।

